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    भारत में तीन लोग जीका वायरस से प्रभावित, इस तरह करे अपना बचाव

    मुंबई  -  

    ब्राजील , दक्षिण अमेरिका में अपना कहर बरपाने के बाद अब जीका वायरस ने भारत में भी दखल दे दिया है। गुजरात के अहमदाबाद में इस वायरस से तीन लोग ग्रसित पाए गये है। जीका वायरस भी डंक से फैलता है। पहला मामला फरवरी 2016 , दूसरा मामला नवंबर 2016 तो वहीं तिसरा मामला जनवरी 2017 में सामने आया। इन तीनों मामलों की जांच पुणे के प्रयोगशाला में की गई।विदेशो से आनेवाले यात्रियों में ये बीमारी ज्यादातर पाई जाती है। जिसके कारण लोगों को इस बीमारी के बारे में खास जानकारी होना चाहिए।


    जीका वायरस के लक्षण-
    जीका वायरस खतरनाक तो है लेकिन जीका वायरस के शिकार लोगों की मौत बहुत कम होती है। जीका वायरस के शिकार लोगों को हल्का बुखार, कंजक्टिवाइटिस (लाल दुखती आंखें), सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, शरीर में चकत्ते की शिकायत हो जाती है।एडिस जाति के मच्छर के काटने से यह वायरस फैलता है।

    फिलहाल जीका वायरस का कोई इलाज नहीं है। इसकी कोई वैक्सीन या दवा नहीं है। इसीलिए जीका के शिकार मरीजों को ढेर सारा पानी पीने और आराम करने की सलाह दी जाती है।
    इसके मरीजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर होती है। ये वायरस गर्भ में पल रहे बच्चों को माइक्रोसेफाली नाम की बीमारी का शिकार बनाता है।


    बचने के लिए क्या क्या किया जाए-
    फिलहाल जीका वायरस का कोई भी इलाज मौजूद नहीं है। लेकिन अगर सही समय पर डॉक्टर सलाह ली जाए तो इसे जल्दी ही रोका जा सकता है।
    जितना हो सके मच्छर मारने वाली दवाईयों का इस्तेमाल करें।
    जहां तक हो सके पूरे कपड़े पहनकर निकले।
    खिड़कियां और दरवाजे बंद करके रखे।
    पानी को समय समय पर बदलते रहे। कुलर और अन्य सामानों में पानी ना जमा होने दे।
    जहां तक हो सके, गर्भवती महिलाए जीका वायरस प्रभावित इलाकों में न जाएं।

    इंडियन मेडिकल असोसिएशन के डॉ.जयेश लेले का कहना है की जीका वायरस से मौत होने की घटना ना के बराबर है। डब्ल्यूएचओ ने भी भारत में इस बीमारी से तीन लोगों के प्रभावित होने की पुष्टी की है। साथ ही बदलते वातावरण के साथ हम अपने पर्यावरण और आसपास की साफ सफाई भी रखना बेदह जरुरी है।


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