custodial death: महाराष्ट्र में 4 साल में कुल 106 मौतें

एक आंकड़ों के मुताबिक़ जो नतीजे सामने आये हैं वे काफी चौकानें वाले हैं। महाराष्ट्र में 'कस्टोडियल डेथ' के मामले में वृद्धि हुई है जिसके तहत पिछले 4 सालों में जेल में मरने वालों की संख्या कुल 106 तक है।

SHARE


वडाला टीटी पुलिस स्टेशन पुलिस हिरासत में लिए गए  कथित रूप से 26 वर्षीय विजय सिंह की मौत को लेकर इस समय काफी हो हल्ला मचा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने 5 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन पुलिस की ज्यादतियों का शिकार एक मासूम हो गया जिसकी शादी एक महीने बाद होने वाली थी।

आंकड़ें और रिकॉर्ड बेहद खराब 
पुलिस हिरासत में मौत (custodial death) होना वैसे तो कोई नयी बात नहीं है लेकिन इस मामले में महाराष्ट्र का रिकॉर्ड काफी दयनीय है। एक आंकड़ों के मुताबिक़ जो नतीजे सामने आये हैं वे काफी चौकानें वाले हैं। महाराष्ट्र में 'कस्टोडियल डेथ' के मामले में वृद्धि हुई है जिसके तहत पिछले 4 सालों में जेल में मरने वालों की संख्या कुल 106 तक है।

साल 2013 से लेकर 2017 तक यानी चार सालों में जेल में 106 आरोपियों की मौत हुई है। अगर अन्य राज्यों की बात करें तो यूपी में 35, गुजरात में 33 और पश्चिम बंगाल में 25 मामले सामने आये हैं।

जांच में भी ढिलाई
महाराष्ट्र में साल 2014 में जेल में कुल 26 मौतें हुई थीं। स्थिति तब और खराब हो जाती हैं जब इन मामलों में संतोषजनक जांच नहीं की जाती। महाराष्ट्र में हुए कुल 106 मौतों में से अब तक मात्र 47 मामले ऐसे हैं जिनकी जांच चल रही है जबकि 14 मामले ऐसे हैं जहां दोषी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया और 19 मामलों में दोषी पुलिस वालों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी है।

ऐसा नहीं है कि मुंबई में वडाला टीटी पुलिस स्टेशन में हुए 'कस्टोडियल डेथ' का यह पहला मामला है, इसके पहले धारावी, मालवणी, कुर्ला, समतानगर, शाहूनगर जैसे पुलिस स्टेशनों पर भी 'कस्टोडियल डेथ' का मामला सामने आ चुका है।

कोर्ट के नियमों की अनदेखी
इस मामले में बढ़ोत्तरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कई गाईड लाइंस जारी की गयी हैं जैसे लॉकअप और पूछताछ रूम में सीसीटीवी लगाना। लेकिन अभी भी ऐसे कई पुलिस स्टेशन हैं जो नियमों की अनदेखी करते हैं जिससे ऐसे मामलों में वृद्धि होती है।

संबंधित विषय
ताजा ख़बरें