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26/11 हमले की 9वीं बरसी: आतंकवाद से निपटने के लिए कितने तैयार हैं हम, पढ़िए यह रिपोर्ट!

मुंबई हमले के बाद भी कुछ सीखा नहीं गया।

26/11 हमले की 9वीं बरसी:  आतंकवाद से निपटने के लिए कितने तैयार हैं हम, पढ़िए यह रिपोर्ट!
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मुंबई पर हुआ 26/11 हमला वह दर्द है जिसे भारत कभी नहीं भूलेगा। इस हमले में 164 लोगो ने अपनी जान गंवाई थी जबकि 300 से अधिक लोग जख्मी हो गए थे। पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब अपने 9 साथियों के साथ पूरे मुंबई पर हमला करने की फिराक में था। इस हमले ने भारत की सुरक्षा ऐजेंसियों पर सवाल खड़े कर दिए थे। 26/11 जैसे संगठित और सुनियोजित तौर पर अंजाम दी गई घटनाओं से ही देश की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई थी। इस आतंकी हमले ने देश को आतंकवाद से सुरक्षा को लेकर अपनी तैयारियों पर सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया। सवाल उठता है कि ऐसे हमलावर जो हमारे बीच ही मौजूद हैं उनके लिए कितने तैयार है? इस हमले से हमने कितना सीखा? क्या हम आज भी तैयार हैं कि अगर दुबारा इस तरह का हमला हो तो हम मुंह तोड़ जवाब दे सकें। आइये एक नजर डालते हैं मुंबई लाइव के द्वारा मुंबई की सुरक्षा को लेकर किये गए रियल्टी चेक पर।


सीएसटी रेलवे स्टेशन का मेटल डिक्टेटर बंद

सीएसटी रेलवे स्टेशन, जहां अजमल कसाब ने ताबड़तोब गोलीबारी करके 52 लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। इस स्टेशन से लाखो यात्री यात्रा करते हैं। इस स्टेशन पर 300 सीसीटीवी लगाए गए हैं लेकिन प्रवेश द्वार का मेटल डिक्टेटर अभी भी बंद पड़ा हुआ है। कोई भी कुछ भी लेकर अंदर घुस सकता है। सीसीटीवी पहचान बता सकता है ना कि हमला रोक सकता है।


इस स्टेशन पर कूल 20 मेटल डिक्टेटर लगाए गए हैं, लेकिन अधिकांश खराब पड़े हुए हैं। सामानों की चेकिंग के लिए कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है। लोग आसानी से मेटल डिक्टेटर के अगल बगल से निकल जाते हैं। इस बारे में जब सुरक्षाकर्मियों से पूछा गया तो वे कहते हैं कि अगर कोई संशयित व्यक्ति नजर आता है तो हम उसका सामान जरूर चेक करते हैं। अब आप आसानी से समझ सकते हैं कि सुरक्षा को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है? यह तब का हाल है जब मुंबई आतंकी हमले का दंश एक बार नहीं कई बार झेल चुकी है।

समुद्री सुरक्षा कितनी पुख्ता?

इस हमले में आतंवादी समुद्री रस्ते से मुंबई में घुसे थे। इसे देखते हुए प्रशासन की तरफ से समुद्री तटीय इलाको में निगरानी रखने के लिए एक वॉच टॉवर बनाया गया है। नियमतः इस वॉच टॉवर से 24 घंटो तटीय इलाको पर नजर रखी जानी चाहिए लेकिन जब मुंबई लाइव 25 नवंबर को यहां पहुंचा तो यह टावर पूरी तरह से खाली था।


कफ परेड पोस्ट भी खाली 

कफ परेड इलाके में जहां आतंकी उतरे थे वहां सुरक्षा के नाम पर एक निगरानी पोस्ट बनाया गया है लेकिन यह पोस्ट भी मुंबई लाइव को खाली मिली। पुलिस या फिर किसी सुरक्षा रक्षक का कोई अता पता नहीं था। हाँ! यहां एक सीसीटीवी लगा हुआ जरूर दिखाई दिया लेकिन वह चालू है या बंद, इसका कुछ अता पता नहीं चल सका।

परिस्थिति कब बदलगी?

यहां के स्थानीय निवासी और मच्छीमार समिति के अध्यक्ष दामोदर तांडेल बताते हैं कि इस टावर पर शायद ही कोई पुलिसकर्मी आता हो। उन्होंने बताया कि इस इलाके में कुल 450 बोट हैं जो मछली पकड़ने का काम करतीं हैं लेकिन आज तक कभी कोई बोट नहीं चेक की गयी। तांडेल आगे कहते हैं कि 26/11 हमले के बाद हर बोट को बायोमैट्रिक कार्ड देने की बात सरकार ने कही थी लेकिन आज भी वह काम अधूरा पड़ा हुआ है केवल कुछ लोगों को ही यह कार्ड दिया गया है। एक चौकाने वाला खुलासा करते हुए तांडेल ने बताया कि कई अवैध नेपाली और बांग्लादेशी लोग इस बोट से मछली पकड़ने का काम करते हैं, लेकिन उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है।


हाई स्पीड बोट खा रही है धुल

तांडेल ने सरकारी योजना के बारे में बात करते हुए कहा कि तटीय सुरक्षा के लिए सरकार ने 53 हाईस्पीड बोट मंगाया था उनमे से आज कई बोट समुद्र के किनारे धूल खा रहीं हैं, किसी बोट में पेट्रोल नहीं है तो चलाने के लिए कोई चालक नहीं है।

आज भी बुलेटप्रूफ जैकेट का इन्तजार

किसी भी संभावित हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पुलिस जवानों की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ उपलब्ध कराने की घोषणा सरकार ने की थी, लेकिन आज तक उसे वादे  को सरकार ने पूरा नहीं किया। 2010 में इसके लिए दो बार टेंडर भी निकाला गया लेकिन इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। हालांकि राज्य सरकार की तरफ से 390 करोड़ में से 6.2 करोड़ रूपये कीमत के 82 बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने का निर्णय लिया गया लेकिन इसकी क्वालिटी को देखते हुए यह करार भी रद्द कर दिया गया।

इसके बाद 2015 में फिर से टेंडर फिर से जारी हुआ। इस बार बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट के लिए MKU नामकी कम्पनी को ठेका दिया गया, कंपनी की तरफ से 5 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट पुलिस कर्मियों को दिए गए लेकिन पुलिस ने बिना क्वालिटी जांच के यह जैकेट लेने से मना कर दिया।

मुंबई हमले के बाद इस तरह के रियल्टी चेक हर बार किये जाते हैं, इस बारे में हर साल बात की जाती है, लेकिन वही ढाक के तीन पात। मुंबई लाइव आशा करता है कि जब अगली बार इस तरह के रियल्टी चेक होंगे तो सुरक्षा में कोई बड़ी खामी नजर नहीं आएगी। पर सवाल ये है कि भारत में सरकारें और ब्यूरोक्रेट्स इसको लेकर कितनी सजग हैं ये कह पाना मुश्किल है?





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