बिलकिस बानो रेप केस: 11 दोषियों की सजा बरकरार

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बिलकिस बानो रेप केस: 11 दोषियों की सजा बरकरार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की उम्रकैद की सज़ा को बरकरार रखा है। सभी आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने 3 दोषियों को फांसी देने की सीबीआई याचिका भी खारिज कर दी है। हालांकि, कोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कुछ दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की गई थी। जिन आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने दोषी माना उन्हें हाईकोर्ट ने भी दोषी माना है। कोर्ट ने 7 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को भी पलट दिया है, इनमें डॉक्टर और पुलिसवाले शामिल हैं। इनपर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप है।

क्या हुआ था उस दिन?
अहमदाबाद से 250 किमी दूर रंधीकपुर गांव में 3 मार्च, 2002 को बिलकिस बानो के परिवार के परिवार पर एक भीड़ ने हमला कर दिया था. इस हमले में बिलकिस के 3 साल की बेटी सहित उसके परिवार के 14 लोगों की हत्या कर दी गई थी। पांच माह की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया,उस वक्त बिलकिस बानो 19 साल की थीं। बिलकिस बानो ने 4 मार्च 2002 को पंचमहल के लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करायी।

केस किया गया मुंबई ट्रांसफर
इस मामले की शुरुआती जांच अहमदाबाद में शुरू हुई। सीबीआई ने 19 अप्रैल 2004 को अपनी चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद बिलकिस ने यह आशंका जाहिर की थी कि गवाहों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है और सीबीआई के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो की मांग पर 6 अगस्त, 2004 में मामले को मुंबई ट्रांसफर कर दिया। यूडी साल्वी की विशेष अदालत ने 21 जनवरी 2008 को दिए अपने फैसले में बिलकिस के साथ सामूहिक बलात्कार करने और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने के मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया था। इन 11 दोषियों ने अपनी सजा के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन 4 मई को सुनाए गए अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकी सजा बरकरार रखी।

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