डॉन बनने से लेकर पेन नेम तक की कहानी

 Mumbai
डॉन बनने से लेकर पेन नेम तक की कहानी

मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। मुंबई सपनों की नगरी है, अगर आपमें कुछ कर गुजरने का जज्बा और लगन है तो आप अपना मुंबई में हर सपना पूरा कर सकते हैं। मुंबई आपको जीरो से सीधा हीरो बना सकती है। इस रेस में रिलायंस के जनक धीरूभाई का नाम अग्रणी है। पर यहां कुछ गैंगस्टेर भी बनें और उन्होंने यहां राज किया। एक ऐसा वक्त था जब दाऊद, हाजी मस्तान, करीम लाला, छोटा राजन, वरदराजन, अरुण गवली जैसे अनेक माफियाओं की मुंबई में हुकूमत चलती थी। अधिकतर लोगों को अंडरवर्ल्ड माफिया का इतिहास पता है। पर एक चीज है जो आपको पता नहीं होगी, वह है इनके पेन नेम (प्यार का नाम) जो काफी दिलचस्प भी हैं।  उनके व्यक्तित्व के आधार पर इनके ये नाम पड़े हैं।


मुच्छड़

दाऊद इब्राहिम कासकर अपराध की दुनियां का बड़ा नाम। दाऊद का बचपन मुंबई के डोंगरी परिसर में बीता। दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर पुलिस कॉन्स्टेबल थे। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते 10 साल की उम्र में दाऊद ने स्कूल छोड़ दिया। 14 साल की उम्र में दाऊद ने पहले अपराध को अंजाम दिया। उसने रास्ते चलते एक व्यक्ति के पैसे छीने और भाग निकला। 15 साल की उम्र तक पहुंचते पहुंचते उसने छोटी मोटी चोरियां पर अपनी पकड़ बना ली थी। थोड़ा सा समय गुजरा और दाऊद ने खुद की टोली बना ली। जिसके बाद माफिया करीम लाला के साथ मिलकर अपराधों को अंजाम देने लग गया।  पर बाद में दाऊद अपने भाई सब्बीर के साथ मिलकर काम करने लगा और करीम लाला का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया। 1975 मे दाऊद हाजी मस्तान के साथ जुड़ा और धीरे धीरे दाऊद हाजी मस्तान का खास आदमी बन गया। यहां से उसने तेजी से अपराध करने शुरु कर दिए। ऐसा कोई भी अपराध बाकी नहीं होगा जो दाऊद के हाथों हुआ ना हो और वह इस तरह से अंडरर्ल्ड डॉन बन गया। 

दाऊद बड़ी बड़ी मूंछें रखता था इसलिए उसे कुछ लोग मुच्छड़ के नाम से पुकारने लगे थे। मुच्छड़ नाम से पुकारने की आजादी कुछ ही लोगों को थी।


छोटा राजन

छोटा राजन उर्फ राजेंद्र सदाशिव निकालजे का जन्म मुंबई के  चेंबूर उपनगर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। छोटा राजन के पिता सदाशिव ठाणे के हेस्ट कंपनी में कामगार थे। 5वीं में ही  छोटा राजन ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। इसके बाद छोटा राजन ने फिल्मों के टिकट ब्लेैक करना शुरु कर दिए।  1978 में पुलिस ने टिकट ब्लैक करने वालों के खिलाफ एक थिएटर के पास लाठी चार्ज की। इस दौरान छोटा राजन ने पुलिस को काटते हुए हमला किया। इस घटना में 5 पुलिस वाले जख्मी हुए। यहीं से छोटा राजन प्रसिद्ध हुआ।

बाद में छोटा राजन ने दाऊद को ज्वाइन किया। बड़ा राजन की हत्या करने के बाद छोटा राजन दाऊद का खास आदमी बन गया। पहले बड़ा राजन दाऊद की ही गैंग में था उसी दौरान दाऊद ने राजेंद्र सदाशिव निकालजे को छोटा राजन नाम दिया।


छोटा शकील

1994 में छोटा राजन दाऊद की गैंग से बाहर हो गया। जिसके चलते छोटा शकील दाऊद का खास आदमी बन गया और जल्द ही यह दाऊद का खास आदमी बन गया। वह डी कंपनी के  सीईओ के नाम से जाने जाना लगा। उसपर 1993 में मुंबई हमले का आरोप है। इस तरह के अनेक अपराधों में उसकी भागीदारी है।

दाऊद की कंपनी में शामिल होने के बाद इस अपराधी को छोटा शाकील नाम दिया गया था। गैंग में पहले से शकील नाम का एक गैंगस्टर था। शकील की लंबाई कम थी इसलिए इसे छोटा शकील नाम दिया गया।


फहिम मचमच

90 के दशक में दाऊद की सारी वसूली का काम फहिम देखता था। पर 1993 के बाद काम छोटा शकील यह काम संभालने लगा। पर शकील पर पुलिस की नजर होने की वजह से यह काम फिरसे फहिम को मिला। फहिम पर कई तरह के मामले दर्ज हो गए थे जिसकी वजह से वह बहुत बड़बड़ा हो गया था। इसलिए फहिम का नाम फहिम मचमच पड़ गया।


ताहिर टकला 

दाऊद के लिए काम करने वाले ताहिर मर्चेंट को युएई में गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद उसे इंडिया लाया गया। 1993 के बॉम्ब ब्लास्ट में दाऊद समेत ताहिर भी शामिल था। ताहिर टकला रहता था, इसलिए बाद में उसे ताहिर टकल्या के नाम से जाना जाने लगा।


डैडी 

मध्य प्रदेश के खंडवा जिला से काम की तलाश में अरुण गवली के पिता गुलाबराव मुंबई आए थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने की वजह से उसने 5वीं के बाद स्कूल को बाय बाय कह दिया। पढ़ाई छोड़ने के बाद उसने लोगों के घर घर जाकर दूध बेचना शुरु कर दिया। अरूण गवली के पिता  गुलाबराव को स्थानीय गुंडों ने खूब परेशान किया। पर इसमें पुलिस ने उनकी मदद नहीं की। जिसके चलते 1980 में गवली राम नाईक गैंग से जुड़ा। आगे चलकर वह दाऊद के लिए भी काम करने लग गया। पर दाऊद के दुबई शिफ्ट होने के बाद गवली को मुंबई में अपना साम्राज्य स्थापित करने का मौका मिला। बिल्डर और बिजनेसमैन अपने प्रतिस्पर्धियों को समाप्त करने के लिए गवली की मदद लेने लगे। इस तरह से मुंबई में गवली का साम्राज्य बढ़ने लगा। 1980 के दशक में अरूण गवली ने दाऊद के विरोध में खुद की गैंग शुरु की। मुंबई की दगळी चॉल में गवली का एकक्षत्र राज्य स्थापित रहा। यहां पर उसकी खुद की गैंग थी। इस गैंग के सभी पंटर उसे डैडी के नाम से पुकारने लगे। गवली को भी यह नाम पसंद आया और उस समय से सभी उसे डैडी के नाम से पुकारने लगे।

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