सनातन संस्था: विवादों से है गहरा नाता, इसीलिए उठती है प्रतिबंध लगाने की मांग


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मुंबई के नालासोपारा में एटीएस द्वारा मारे गयी छापेमारी में सनातन संस्था के सदस्य वैभव राउत के घर और दुकान से देशी 8 बम बरामद हुए साथ ही डेटोनेटर और बम बनाने की सामग्री भी मिली है। इससे एक बार फिर इस सनातन संस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आपको बता दें कि इस सनातन संस्था का विवादों से गहरा नाता है। 


1990 में हुई थी स्थापना 
सनातन संस्था का गठन साल 1990 में जयंत बालाजी अठावले द्वारा किया गया था। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य आध्यात्म, शिक्षा और धर्म का प्रचार प्रसार करना था। गोवा की राजधानी पणजी में सनातन संस्था का मुख्यालय बना है।

मालेगांव ब्लास्ट में आय नाम सामने 
मालेगांव में साल 2006 और 2008 में हुए बम ब्लास्ट में अभिनव भारत के साथ साथ हिंदू राइट विंग पर भी सवाल उठे थे उस समय सनातन संस्था का नाम भी सामने आया था। यही नहीं जब 2007 में वाशी, ठाणे, पनवेल और 2009 में गोवा बम ब्लास्ट हुआ था तब पुलिस ने इस संस्थान से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया था।

विपक्ष ने डाला दबाव 

एटीएस ने साल 2011 में राज्य गृह विभाग को प्रस्ताव भेज कर यह मांग की थी कि ब्लास्ट के पीछे सनातन संस्था का हाथ है इसीलिए इस संस्था पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम)अधिनियम(UAPA) के तहत प्रतिबंध किया जाये। यही नहीं इस सनातन संस्था पर 2013 में नरेंद्र दाभोलकर, 2015 में गोविंद पानसरे के साथ साथ काल बुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या से भी नाम होने का आरोप लगा। इसके बाद तो संस्था को प्रतिबंध करने की मांग और भी उठने लगी। 

सरकार ने सबूत नहीं होने का किया दावा 

दबाव बढ़ता देख गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में यह जानकारी दी थी की गोविंद पंसारे, नरेंद्र दाभोलकर और एमएम कलबुर्गी की हत्याओं के बीच सनातन संस्था का किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं हैं। साथ में उन्होंने यह भी कहा था की इस संस्था पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

'सबूत मिले तो करेंगे कार्रवाई'
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी दोष साबित होने पर इस संस्था के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है लेकिन  विपक्ष का कहना है कि इस संस्था को सरकार का समर्थन है। इसीलिए इसे बैन नहीं किया जा रहा है।

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