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Online fraud : बैंक के जिस कस्टमर केयर से आप मांग रहे हैं सहायता, क्या वह असली है?

साइबर अपराधियों ने पहले से ही इंटरनेट पर कस्टमर सपोर्ट के नाम खुद का नंबर डाल रखा है। लोग उसे ही कस्टमर सपोर्ट नंबर समझ कर कॉल कर देते हैं।

Online fraud : बैंक के जिस कस्टमर केयर से आप मांग रहे हैं सहायता, क्या वह असली है?
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प्रेम कुमार सुबह से ही परेशान थे। उनका ऑनलाइन ट्रांजेक्शन एरर आ रहा था। उनको अर्जेंट में काम से पैसा भेजना था। कुछ समझ में न आता देख, उन्होंने बैंक के कस्टमर केयर का नंबर गूगल से निकाला और उसे फोन किया। कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने रवि को कुछ इंस्ट्रक्शंस फॉलो करने के लिए कहा। रवि ने वैसा ही किया। उनके फोन पर OTP भी आई, उसे भी रवि ने बताया, और जो जानकारी एग्जीक्यूटिव ने मांगी वह भी दी। इसके बाद एग्जीक्यूटिव ने रवि से कहा कि, उनकी समस्या हल हो गई है। जैसे ही रवि ने फोन कट किया, उनके खाते से 10 हजार रुपये निकाले जाने का मैसेज आया। उसके बाद एक के एक और भी मैसेज आये, जो यह बता रहे थे कि, उनके खाते से 10-10 रुपये कई बार निकाले गए हैं। यह देख रवि के होश फाख्ता हो गए। 

आनन फानन में उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर दिया। और थोड़ी देर बाद जब खोला तब तक 3 मैसेज और भी आ गए थे। तब तक रवि के खाते से 80 हजार रुपये निकल चुके थे। इसके बाद रवि ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई।

बता दें कि, साइबर अपराधियों ने पहले से ही इंटरनेट पर कस्टमर सपोर्ट के नाम खुद का नंबर डाल रखा है। लोग उसे ही कस्टमर सपोर्ट नंबर समझ कर कॉल कर देते हैं।

बाद में फर्जी कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव के तौर पर अपराधी उनसे उनकी पर्सनल डिटेल लेकर फ्रॉड को अंजाम देते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट एप्लिकेशन जैसे- गूगल पे, फोन पे, पेटीएम के सबसे ज्यादा फर्जी कस्टमर सपोर्ट नंबर इंटरनेट पर डाले गए हैं, जिससे कस्टमर खुद साइबर अपराधियों तक पहुंच रहे हैं।

अभी तो और भी उदाहरण है, पिछले साल एक खबर आई थी कि,अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने ऑनलाइन एक हेडफोन खरीदा था, जब उन्होंने उसे खोला तो उसमें हेडफोन की जगह कुछ और ही था।

इसके पहले भी ऑनलाइन आईफोन की खरीदने जगह ग्रहकों को कंपनी से कुछ और आने की खबरें कई बार सामने आ चुकी है।

ये सब खबरें पढ़कर या सुनकर किसी भी इंसान का भरोसा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से भरोसा उठ जाएगा। जबकि पीएम नरेंद्र मोदी कई मंच से इकॉनमी को कैशलेश करने की बात कर चुके हैं। 

यही नहीं कोरोनावायरस के चलते पूरी दुनिया में इस समय अधिकांश ऑनलाइन लेनदेन बढ़ गया है, तो वहीं फिजिकल लेन-देन 50 फीसदी तक घट गया है। और जैसे जैसे ऑनलाइन लेनदेन बढ़ रहा है ठगी भी बढ़ रही है। ठगी करने वाले साइबर अपराधी भी अब ज्यादा सक्रिय हैं। ऐसे में आप साइबर क्राइम के बारे में जानकारी से ही बच सकते हैं।

इन बारे में रिपोर्ट कहती है कि, सबसे जरूरी बात है- ऑनलाइन लॉटरी, कैसिनो, गेमिंग, शॉपिंग या फ्री डाउनलोड का लालच देने वाली वेबसाइट्स में अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड्स के डिटेल्स को कतई न डालें। इसके अलावा लुभावने मैसेज के जरिए भेजी जाने वाली प्रमोशनल लिंक पर डाइरेक्ट क्लिक करने से बचें।

ये लिंक आमतौर पर फिशिंग गिरोहों द्वारा त्योहारों के दौरान भेजी जाती हैं। इन लिंक्स के जरिए उपभोक्ता के एकाउंट नंबर और पासवर्ड हैक कर लिए जाते हैं। ईमेल एकाउंट का पासवर्ड तो तुरंत हैक हो जाता है। फिर इसका दुरुपयोग आसानी से किया जा सकता है।

आजकल मैसेज, कॉल और मेल के जरिए तमाम तरह के ऑफर दिए जा रहे हैं। आईफोन समेत तमाम ब्रांडेड फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक एसेसरीज मामूली दामों पर ऑफर किए जा रहे हैं।

फर्जी बैंकर बनकर कैशबैक और क्रेडिट कार्ड ऑफर करना भी फ्रॉड की दुनिया में काफी चलन में है। इसी तरह के लालच देकर कस्टमर से उसकी प्राइवेट डिटेल ली जा रही है और बाद में उनके अकाउंट को खाली कर दिया जा रहा है।

साइबर क्राइम की दुनिया में एक नया तरीका ट्रेंड में है। इसमें आपके क्लोज फ्रेंड के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर फेसबुक या इंस्टाग्राम पर नई रिक्वेस्ट भेजी जाती है। फिर मैसेज भेजकर इमरजेंसी के नाम पर पैसा मांगा जाता है।

फर्जी प्रोफाइल में फोटो से लेकर इन्फो तक सबकुछ हूबहू डाली जा रही है, जिससे लोगों को जरा भी शक नहीं होता। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप यह पता कर सकते हैं कि जिस प्रोफाइल से पैसा मांगा जा रहा है, वह फर्जी है या नहीं हालांकि कुछ सावधानियां बरत कर इससे बचा जा सकता है।

साइबर एक्सपर्ट ललित मिश्रा कहते हैं कि, आजकल वॉलेट ऐप जैसे- गूगल पे, फोन पे और पेटीएम पर मनी रिक्वेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। इन सभी वॉलेट ऐप पर अलर्ट नोटिफिकेशन की सुविधा उपलब्ध है। जब भी कोई आपके वॉलेट ऐप में लॉगिन करने की कोशिश करेगा तो आपको अलर्ट नोटिफिकेशन आएगा, संदेह होने पर आप परमीशन डिनाई भी कर सकते हैं। इसलिए नोटीफिकेशन ऑन रखें।


जब भी ऑनलाइन लेनदेन करें, उसके बाद फौरन कुकीज़ डिलीट कर दें। अगर आप ट्रांजेक्शन के बाद कुकीज डिलीट नहीं करते हैं तो इंटरनेशनल हैकर्स के लिए आपकी डिटेल को रीड करना आसान हो जाता है। 

इसलिए ब्राउजर के जरिए जब भी पेमेंट करें ब्राउजर की सेटिंग में जाकर कुकीज डिलीट करना न भूलें।

सरकार के भीम UPI या अन्य बडी कंपनियों के UPI का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, उपभोक्ताओं को डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कम करना चाहिए।

धोखाधड़ी के शिकार होने पर यह करें: 

अपने बैंक के संबंधित अधिकारी को तुरंत सूचित करें। इसके अलावा कस्टमर केयर सेंटर पर सूचना दर्ज कराएं और दर्ज सूचना का नंबर भविष्य के लिए सुरक्षित रखें, ताकि बैंक आपके पैसे आपको रिफंड कर सके। इसमें यह ध्यान रखें कि शिकार होने पर तत्काल इसकी शिकायत करें, वर्ना देर होने पर रिफंड होने के चांसेस कम होने लगते हैं।

RBI द्वारा साल 2017-18 में एक गाइडलाइन जारी की गई थी। जिसके मुताबिक, धोखाधड़ी की सूचना दर्ज कराने के बाद ट्रांजेक्शन की पूरी जिम्मेदारी बैंक पर होती है, यदि तय प्रक्रिया के मुताबिक संबंधित बैंक को सूचित नहीं किया गया तो जिम्मेदारी उपभोक्ता की होती है। इस स्थिति में बैंक पर रिफंड करने की कानूनी बाध्यता लागू नहीं होती।

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