मुंबई : फर्जी कोरोना टीकाकरण मामले में हुआ चौकानें वाला खुलासा

चौंकाने वाली बात यह है कि इस फ्रॉड का मास्टरमाइंड 10वीं फेल शख्स है। वह शख्स पिछले 17 साल से चिकित्सा क्षेत्र में काम कर रहा है।

मुंबई : फर्जी कोरोना टीकाकरण मामले में हुआ चौकानें वाला खुलासा
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मुंबई (Mumbai) के कांदिवली स्थित हीरानंदानी सोसाइटी में नागरिकों के फर्जी कोविड टीकाकरण (covid vaccination) के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीन से चार लोग अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। खास बात यह सामने आई है कि इन आरोपियों ने मुंबई (Mumbai) में नौ जगहों पर इसी तरह के टीकाकरण शिविर लगाकर नकली वैक्सीन लोगों को लगाई है।

इन आरोपियों में एक बड़े अस्पताल का कर्मचारी भी शामिल है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फ्रॉड का मास्टरमाइंड 10वीं फेल शख्स है। वह शख्स पिछले 17 साल से चिकित्सा क्षेत्र में काम कर रहा है। इस शख्स ही टीका लगाने और शिविर आयोजित करने की जिम्मेदारी थी। आरोपियों में एक मध्य प्रदेश का रहने वाला है। उसने सतना जिले से वहां टीकों की आपूर्ति की थी।

बता दें कि, 30 मई को कांदिवली स्थित हीरानंदानी एस्टेट सोसायटी में टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में 390 नागरिकों को कोविशील्ड वैक्सीन (covishield vaccine) दी गई थी। इस  शिविर का संचालन राजेश पांडेय नामके एक शख्स ने किया था। सोसायटी के नागरिकों ने बताया कि, पांडेय ने अपने आप को कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल  (kokilaben ambani hospital) प्रतिनिधि बताया थाा। राजेश पांडेय ने सोसायटी कमेटी के सदस्यों से संपर्क किया था। नागरिकों ने जानकारी दी है कि संजय गुप्ता ने शिविर लगाया जबकि महेद्र सिंह ने सोसायटी के सदस्यों से पैसे लिए थे।

हालांकि, टीकाकरण के बाद किसी को कोई मैसेज नहीं मिला। निवासियों ने यह भी कहा कि टीका लेने के बाद उनमें कोई लक्षण या दुष्प्रभाव भी नहीं दिखाई दिया। जिन अस्पतालों के नाम से प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जब उनसे पता किया गया तो उन अस्पतालों ने ऐसे किसी टीकाकरण शिविर आयोजित करने से इनकार कर दिया। सोसायटी के नागरिकों ने 1260 रुपए प्रति डोज का भुगतान किया था।

जांच में यह बात भी सामने आई कि, इस सोसायटी में टीकाकरण के लिए BMC से कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी। साथ ही इस टीकाकरण शिविर में कोई चिकित्सा अधिकारी भी मौजूद नहीं था। यह भी पता चला है कि शिविर में इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन किसी आधिकारिक आपूर्तिकर्ता से नहीं ली गई थी।

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