बच्चों और महिलाओं की तस्करी के सबसे अधिक मामले मुंबई, कोलकाता और इंदौर से

यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स ऐंड क्राइम (UNODC) ग्लोबल ने 2018 में तस्करी पर रिपोर्ट जारी की थी।

बच्चों और महिलाओं की तस्करी के सबसे अधिक मामले मुंबई, कोलकाता और इंदौर से
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महाराष्ट्र में पिछलें कुछ महिनो में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हो रहे अपराध में बढ़ोत्तरी देखी गई है।  हालांकी इस बीच एक और आकड़े की वजह से सरकार की नींद फिर से उड़ सकती है। बच्चों और महिलाओं की तस्करी के सबसे अधिक मामले मुंबई, कोलकाता और इंदौर जैसे शहरों में दर्ज हुए हैं। यह जानकारी नैशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के डेटा से मिली है। बच्चों और महिलाओं के लापता होने का डेटा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जुटाया गया है। 

जबरदस्ती विवाह करने, बाल श्रम, घरेलू मदद और यौन शोषण बड़ा कारण 

सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में एक पैनल बनाया था, जिसने 2019 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस पैनल ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि वह NCRB को गुमशुदा बच्चों और महिलाओं का डेटा एकत्र करने का आदेश दे ताकि ज्यादा तस्करी वाले इलाकों की पहचान की जा सके। NCRB की स्टडी के मुताबिक, जबरदस्ती विवाह करने, बाल श्रम, घरेलू मदद और यौन शोषण जैसी चीजें तस्करी के बड़े कारण थे।

मध्य प्रदेश में बच्चों के गायब होने की सबसे अधिक घटनाएं 

2011 की जनगणना के अनुसार, मुंबई और दिल्ली क्रमश: 18,394,912 और 16,349,831 के साथ सबसे अधिक जनसंख्या वाले महानगर थे। कोलकाता का 14,035,959 आबादी के साथ तीसरा नंबर था। यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स ऐंड क्राइम (UNODC) ग्लोबल ने 2018 में तस्करी पर रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि यौन शोषण के लिए तस्करी के शिकार लोगों में से अधिकतर महिलाएं थीं। मध्य प्रदेश में बच्चों के गायब होने की सबसे अधिक घटनाएं हुईं जबकि महाराष्ट्र में महिलाओं के खोने के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए। 


रिपोर्ट के अनुसार, ‘तस्करी से निपटने के मामले में मुंबई, पुणे और ठाणे कमिश्नरेट सबसे कमजोर नजर आते हैं। मुंबई कमिश्नरेट ने 2017 और 2018 के दौरान क्रमशः 4,718 और 5,201 महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज किए हैं, जो सबसे अधिक है। पुणे कमिश्नरेट दोनों वर्ष क्रमश: 2,576 और 2,504 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर था।’

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