भगवान राम की प्यास ने बाणगंगा को दिया जन्म, जानिए इतिहास और आध्यात्मिक महत्व!

भगवान राम को प्यास लगी थी और उन्होंने लक्ष्मण से पानी मांगा, लक्ष्मण ने पानी को खोजने की बहुत कोशिश की, जब पानी नहीं मिला तो उन्होंने पृथ्वी पर बाण साधा और तब जाकर गंगा का उदय हुआ, जोकि बाणगंगा कहलाई।

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मुंबई भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां घूमने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं। पर्यटक को मुंबई में प्रमुख रूप से गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, गिरगांव चौपाटी, जुहू चौपाटी, बाबुलनाथ मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, हाजी अली, एलीफेंटा की गुफाएं और माउंट मैरी चर्च अट्रैक्ट करते हैं। पर इन सब जगहों के बारे में तो हर कोई जानता है। इसके बारे में आपको इंटरनेट पर भी खूबसारी जानकारी मिलेगी। पर देखा जाए तो मुंबई में कुछ ऐसी भी जगह हैं जिनका अपना ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है, पर इन्हें जानते बहुत ही कम लोग हैं।

साथ ही इन जगहों के बारे में आपको इंटडरनेट पर भी ज्यादा कुछ नहीं मिलेगा। हमारी इस लिस्ट में पहली जगह बनाई है, बाणगंगा ने जोकि वालकेश्वर में स्थित है।

बाणगंगा

मुंबई शहर 7 महाद्वीपों से मिलकर बना है। मुंबई को तीन तरफ से समुद्र ने घेरा हुआ है। इसलिए शहर वासियों के के लिए पीने और उपयोग का पानी मुंबई के बाहर से तानसा, वैतरणा और विहार जैसे जलाशयों से आता है। ऐसे में समुद्र से सटे वालकेश्वर की एक जगह है जहां पर चौबीसों घंटे शुद्ध जल का आना किसी चमत्कार से कम नहीं है। जी हां, वालकेश्वर में एक टैंक है, जिसे बाणगंगा टैंक के नाम से जाना जाता है।

राम की प्यास ने बाणगंगा को दिया जन्म 


ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में जब भगवान राम की पत्नी सीता का रावण ने हरण कर लिया था, तो भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ यहां से गुजरे थे। उसी समय बाणगंगा का उदय हुआ। दरअसल भगवान राम को प्यास लगी थी और उन्होंने लक्ष्मण से पानी मांगा, लक्ष्मण ने पानी को खोजने की बहुत कोशिश की, जब पानी नहीं मिला तो उन्होंने पृथ्वी पर बाण साधा और तब जाकर गंगा का उदय हुआ। भगवान राम की प्यास बुझाने के बाद आज भी यह गंगा लोगों की प्यास बुझ रही है।

पित्तृ पक्ष में लोगों का जमावड़ा

वैसे तो हर समय बाणगंगा पर पूजा-पाठ चलता रहता है। पर पितृ पक्ष और दिवाली के मौके पर यहां लोगों का खासा जमावड़ा होता है। जो लोग गंगा नदी नहीं जा पाते वे अपने पितरों (पूर्वजों) की श्राद्ध और पिंडदान यहीं पर करते हैं। पूजा पाठ के बाद लोग यहां पर पक्षियों को दाना भी डालते हैं।

बालू से बनें 'वालुकेश्वर'

आम तौर पर शिवलिंग चिकने होते हैं, पर यहां के शिवलिंग का आकार बेहद अलग और खुरदरा है। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम ने यहां पर बालू से शिवलिंग बनाया था। पहले इनका नाम बालुकेश्वर था। लेकिन समय के प्रभाव की वजह से यह नाम वालुकेश्वर में बदल गया। बाणगंगा में स्नान करने के बाद भक्तगण भोलेनाथ के यहां पर दर्शन करते हैं। सोमवार और शिवरात्रि के दिन यहां पर लोगों की भीड़ होती है।

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