सोमवार को अंग्रेजी स्कूल रहेंगे बंद?

FSAM आगे कहता है कि सरकार की तरफ से दी जानी चाहिए वह स्कूल को नहीं मिलती, और जो लोग गरीब घर के नहीं होते वे भी अपने बच्चों का एडमिशन RTE के अंतर्गत करा लते लेते हैं।

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अपनी विभिन्न मांगों को लेकर फेडरेशन आॅफ स्कूल एसोसिएशन आॅफ महाराष्ट्र (FSAM) ने सोमवार को सभी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि कई बार अपने मांगें सामने रखने के बाद भी राज्य सरकार की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि एसोसिएशन के मुताबिक इस बंद का हो रही स्कूली परीक्षा या फिर बोर्ड की परीक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

FSAM का कहना है कि गरीब घर के लोग अपने बच्चों को RTE के तहत बड़े स्कूलों में दाखिला कराते हैं। RTE के अंतर्गत आने वाले बच्चों का 25 फीसदी खर्चा सरकार तो 75 फीसदी खर्चा बच्चे के परिवार वालों को उठाना पड़ता है। FSAM आगे कहता है कि सरकार की तरफ से दी जानी चाहिए वह स्कूल को नहीं मिलती, और जो लोग गरीब घर के नहीं होते वे भी अपने बच्चों का एडमिशन RTE के अंतर्गत करा लते लेते हैं। इसीलिए RTE में जो 25 फीसदी का जो कोटा तय किया गया है उसके नियम शर्तों को या तो रद्द किया जाए या फिर उसमें बदलाव किया जाए।

FSAM की  तरफ से जो मांगे सामने रखी गयी है वो इस तरह है,

  • 1 नवंबर 2018 के शासन निर्णय को तत्काल पीछे लिया जाना चाहिए।
  • 2012 से 2019 तक RTE में 25 फीसदी एडमिशन पाए हुए बच्चों को जो फीस प्रशासन की तरफ से बाक़ी है उसे स्कूलों को दिया जाना चाहिए।  
  • राज्य के सभी स्कूलों में 'शाला कवच' जैसा कानून लागू होना चाहिए, इसके लिए 18 नवंबर 2013 शासन आदेश में संशोधन करना चाहिये।
  • स्कूली बसों की जिम्मेदारी शिक्षकों के बदले स्कूल की तरफ से नियुक्त व्यवस्थापक को दिया जाना चाहिए। 
  • स्व वित्त पोषित की प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू होनी चाहिए। 

FSAM का कहना है कि अगर हमारी इन मांगों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो हम एक दिन के लिए स्कूलों को बंद करने का हड़ताल करेंगे।

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