बॉलीवुड के नेशनल अवॉर्ड्स पर जब मच गया बवाल

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बॉलीवुड के नेशनल अवॉर्ड्स पर जब मच गया बवाल

हर साल अपने फैन्स को 3 से 4 फिल्म देने वाले एक्टर अक्षय कुमार को जबसे रुस्तम फिल्म में बेस्ट एक्टिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड की घोषणा की गई है, तबसे लोगों के बीच एक विवाद सा छिड़ गया है। लोगों का मानना है इस साल दंगल, अलीगढ़ और उड़ता पंजाब जैसी अच्छी फिल्में आई हैं। फिर रुस्तम को ही क्यों चुना गया?

आपको बता दें कि 64वें नेशनल अवॉर्ड के ज्यूरी हेड निर्देशक प्रियदर्शन थे। अक्षय और प्रियदर्शन ने कई फिल्मों में साथ काम किया है और कहा गया कि उन्हें यह अवॉर्ड प्रियदर्शन से नजदीकी के कारण ही मिला है। पर यह पहली बार नहीं है जब किसी एक्टर को नेशनल अवॉर्ड देने पर विवाद पैदा हुआ हो।

आइए हम आपको 6 ऐसे एक्टर्स के बारे में बताते हैं, जिन्हें नेशनल अवॉर्ड दिए जाने से पैदा हुए विवाद...


रेखा - उमराओ जान - 1981

1981 में आई फिल्म उमराव जान, रेखा के करियर की बेस्ट फिल्मों में से एक रही और इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया। हलांकि इस फिल्म को अवॉर्ड दिए जाने के खिलाफ आवाजें भी उठी। लोगों कि मांग थी कि जैनीफर कपूर को नेशनल अवॉर्ड देना चाहिए, उस समय उनकी फिल्म 36 चौरंगी लेन रिलीज हुई थी। हालांकि जुरी के सभी मेंबर जैनीफर को अवॉर्ड देने के पक्ष में भी थे, पर यह एक अंग्रेजी फिल्म थी जिसकी वजह से इसे अवॉर्ड नहीं दिया गया। क्योंकि उस समय सिर्फ हिंदी और प्रादेशिक फिल्मों को ही नेशनल अवॉर्ड दिया जाता था। रेखा ने खुद माना था कि इस अवॉर्ड की हकदार जैनीफर कपूर हैं।


शशि कपूर - न्यू डेल्ही टाइम्स - 1985

शशि कपूर को 1985 में न्यू डेल्ही टाइम्स फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। शशि कपूर ने इस फिल्म में एक अखबार के संपादक का किरदार निभाया था। लोगों ने ज्यूरी के इस निर्णय का विरोध किया था, उनकी दलील थी कि शशि कपूर पूरी फिल्म में जेंटलमेन बने रहें, ना उनके लुक में बदलाव ना वो पतले हुए फिर उन्हें यह अवॉर्ड क्यों? पर उस समय जया बच्चन शशि कपूर के समर्थन में उतरी थीं। उन्होंने कहा था कि इतना आसान नहीं होता कि न्यूज पेपर का एडिटर इमानदारी के साथ खबरें प्रकाशित कर सके। शशि कपूर ने बाखूबी अपना किरदार निभाया है, इसलिए वे इस अवॉर्ड के पात्र हैं।


अमिताभ बच्चन  अग्निपथ - 1990
1970 से 1980 तक अमिताभ बच्चन ने एक से बढ़कर एक फिल्में दीं पर 1990 में उनके जीवन का सबसे सुनहरा पल आया। 1990 में उन्हें अग्निपथ फिल्म में बेस्ट एक्टिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड दिया गया। उन्होंने इस फिल्म में अपनी बनावटी आवाज दी थी जो लोगों को पसंद नहीं आई और फिर उनकी ओरिजनल आवाज डब करके फिल्म एक सप्ताह के बाद फिर रिलीज की गई। इसकी वजह से बॉलीवुड के लोगों के साथ साथ उनके फैन्स भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिए जाने से नाराज थे।

 


रवीना टंडन – दमन - 2001
2001 में आई फिल्म दमन में रवीना टंडन ने पत्नी का किरदार निभाया था। उन्हें इसमें बेस्ट एक्टिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड प्रदान किया गया। पर लोगों ने आवाज उठाई की रवीना के मामा स्व. एक्टर मैकमोहन ज्यूरी के मेंबर हैं इसलिए रवीना को पुरस्कार दिया गया। पर विवाद ज्यादा बढ़ने के बाद ज्यूरी के अध्यक्ष प्रदीप किशन ने मीडिया के सामने कहा कि यह निर्णय सर्व सम्मति से लिया गया था।


सैफ अली खान – हम तुम 2004
2004 में सैफ अली खान और रानी मुखर्जी की रिलीज हुई फिल्म हम तुम के लिए सैफ अली खान को नेशनल अवॉर्ड देने की घोषणा की गई। यह बात बहुत सारे लोगों को रास नहीं आई। उस समय सैफ अली खान की मां शर्मिला टैगोर सेंसर बोर्ड की चेयरपर्सन थीं।


अजय देवगन  लीजेंड ऑफ भगत सिंह - 2002
अजय देवगन को 1999 में पहली बार नेशनल अवॉर्ड जख्म फिल्म में बेस्ट एक्टिंग के लिए मिला। लेकिन जब दूसरी बार उन्हें लीजेंड ऑफ भगत सिंह के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला तो यह जांच के दायरे में आ गया था। क्योंकि उस समय ज्यूरी के चेयरपर्सन प्रकाश झा और अजय देवगन अपने प्रोजेक्ट गंगाजल के लिए काम कर रहे थे।

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