100 साल...'अर्धवटराव'...!

 Dadar
100 साल...'अर्धवटराव'...!

दादर - 'अर्धवटराव' को मराठी सिनेमा में किसी पहचान की कोई जरुरत नहीं है । आज भी कई लोगों के जुबान पर अर्धवटराव और आवड़ाबाई का नाम है । ना बोलनेवाला अर्धवटराव लोगों के सामने अलग अलग आवाजें निकालकर लोगों को खुब हंसाता । बच्चों में तो इसे लेकर खासा उत्साह होता है । अब यही अर्धवटराव 100 साल का हो गया है । बुधवार को अर्धवट का 100वां जन्मदिन रामदास पाध्ये के परिवार के साथ दादर के कोहिनुर हॉल में मनाया गया । शब्दों के खिलाड़ी कहलाने वाले रामदास पाध्ये कई सालों से अर्धवट की आवाज बनते आ रहे है । रामदास पाध्ये के पिताजी प्रा. वाय. के. पाध्ये मशहुर जादुगर थे । प्रा. वाय. के. पाध्ये ने 1916 में दो कठपुतलियों को इंग्लैड से भारत लाकर उन्हे भारतीय नाम दिया । और यही से अर्धवटराव और आवडाबाई का जन्म हुआ । पिछलें 49 सालों से रामदास पाध्ये अर्धवटराव को आवाज देते आ रहे है । और अब बहुत जल्द ही फिर से अर्धवटराव एक नए कार्यक्रम 'कॅरी ऑन एंटरटेन्मेंट-रामदास पाध्ये लाइव' में नजर आएंगे । भारत के साथ साथ इस कार्यक्रम का प्रसारण विदेशों में भी किया जाएगा ।

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