जब काबा और मदीना बंद हो सकते हैं तो भारत मे मस्जिद क्यों नहीं- जावेद अख्तर


जब काबा और मदीना बंद हो सकते हैं तो भारत मे मस्जिद क्यों नहीं- जावेद अख्तर
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कोरोना महामारी यानी Covid 19 को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन (lockdown) की घोषणा की गई है। केवल जरूरत की वस्तुओं को छोड़ कर बाकी सभी दुकानों के खोलने पर रोक लगाई गई है। यहां तक की सभी धार्मिक स्थलों को भी बंद रखने का निर्देश दिया गया है, इसके बावजूद कुछ मस्जिदों में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बात को लेकर बॉलीवुड के फेमस गीतकार जावेद अख्तर (javed akhtar) नाराज हो गए हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा है कि जब काबा, मदीना बंद हो सकते हैं तो मस्जिदें क्यों नहीं?

अख्तर ने क्या कहा?

 जावेद अख्तर ने पूर्व अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ताहिर महमूद के हवाले से एक ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि, “ विद्वान और अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ताहिर महमूद ने दारुल देवबंदन से एक फतवा निकलने की मांग की है, जब तक कि कोरोना संकट है तब तक सभी मस्जिदों को बंद कर दिया जाए।  मैं उनकी मांग का समर्थन करता हूं।  अगर काबा और मदीना में मस्जिदों को बंद किया जा सकता है, तो भारत में मस्जिदों को बंद क्यों नहीं किया जा सकता है।


 देश में लॉकडाउन के कारण इस समय सभी कारोबार बंद हैं।  भीड़ के कारण कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को भी बंद कर दिया गया था।  साथ ही, सरकार ने धार्मिक स्थलों और पूजा स्थलों को बंद करने की भी अपील की है।  इसका मुख्य उद्देश्य भीड़ से बचना था।  लेकिन देश की कुछ मस्जिदों में अभी भी सामुहिक रूप से नमाज पढ़ने की खबर सामने आई है।

इस बीच, दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी मरकज़ में एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।  इस कार्यक्रम में कुल 8000 लोग शामिल हुए।  इसमें भारत के विभिन्न हिस्सों से आए हुए लोगों के अलावा अन्य देशों से आए हुए लोग भी थे।लेकिन मामला तब बिगड़ गया जब इनमें से 25 लोगों को कोरोना महामारी से संक्रमित पाया गया और कुछ लोगों की तो मौत भी हो गयी।

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