इंटरव्यू - राबता मगधीरा से प्रेरित नहींः सुशांत सिंह राजपूत

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इंटरव्यू - राबता मगधीरा से प्रेरित नहींः सुशांत सिंह राजपूत

थियेटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत इन दिनों अपनी फिल्म राबता के लिए बेहद उत्साहित हैं। पिछले साल रिलीज हुई सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म एम एस धोनी-द अनटोल्ट स्टोरी हिट रही है। अब राबता फिल्म में वे दो किरदार निभाते नजर आएंगे। इस फिल्म में सुशांत के साथ कृति सेनन राजकुमार राव और छोटे से किरदार में दीपिका पादुकोण भी नजर आने वाली हैं। फिल्म के डायरेक्टर दिनेश विजन हैं। फिल्म 9 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म रिलीज से पहले सुशांत सिंह राजपूत से हमने खास मुलाकात की।


राजपूत करणी सेना द्वारा 'पद्मावती' फिल्म के लिए किए गए विरोध पर आपकी राय ?  

मैंने एक दिन के लिए अपने नाम से सरनेम इसलिए हटाया था, कि जो लोग इसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं मैंने उनको अपना प्रतिनिधि नहीं बनाया है। साथ ही मैं बताना चाहता था कि आपने जो भी किया है वह शर्मनाक है। उन लोगों ने कहा कि पूरा नाम ही हटा दो। यह मेरे लिए बहुत ही संवेदनशील बात है। जैसे किसी के लिए झंडा एक दिन के लिए झुका दिया जाता है तो क्या हमेशा के लिए झंडा झुका ही रहता है। वैसे ही एक दिन के लिए मेरे नाम में से राजपूत हटाना इस बात का संकेत था कि आप लोग पूरे राजपूत समुदाय नहीं हो और आपने जो हरकत की है वह बहुत ही शर्मनाक है। हम ऐसे देश में रहते है जहां अपना दृष्टिकोण रखने पर पीटा जाएगा नहीं रखने पर भी पिटाई होगी। इसलिए ज्यादातर लोग डिप्लोमैटिक जवाब देकर निकल जाते हैं।


दो तरह के किरदार में कौन सा ज्यादा पसंद आया (पीरियड ड्रामा या वर्तमान) ?

मुझे दोनों किरदार करके मजा आया, पर मैं इन दोनों किरदार को एक दूसरे से कंपेयर नहीं कर सकता। क्योंकि जैसे मुझे बिरयानी खाना पसंद है और वीडियो गेम खेलना पसंद है। तो मैं दोनों को कंपेयर नहीं कर सकता। क्योंकि ये दोनों अलग अलग मजे हैं। मैं अपनी नजर में खुद को बहुत बोरिंग इंसान मानता हूं। पर कभी कभी इंटरेस्टिंग हो जाता हूं, पता नहीं क्यों? जो कभी कभी इंटरेस्टिंग अस्पेक्ट हैं तो वह है मेरा पहला कैरेक्टर। मैं तभी कोई फिल्म करता हूं जब मुझे स्टोरी अच्छी लगती है, कैरेक्टर अच्छा लगता है साथ ही मुझे कोई चीज समझ नहीं आती और वही वजह होती है मेरे लिए फिल्म करने की।

मगधीरा फिल्म से कोई कनेक्शन है?

स्क्रिनप्ले की जो किताब होती है उसके पहले अध्याय में यह बताया गया है कि केवल 8 अलग-अलग कहानियां ही होती हैं, जिसे दर्शाया जा सकता है। इन्हीं 8 कहानियों को क्रमचयन संयोजन के द्वारा अलग-अलग कहानी के रूप में दर्शाया जाता है। बस स्क्रीनप्ले और स्टोरी टेलिंग अलग होता है। इसी तरह अगर मैं एक स्टोरी और किरदार को किसी दो डायरेक्टर को दूं तो दोनों का आउटकम अलग अलग होगा। इसलिए ‘राबता’ ‘मगाधिरा’ से प्रेरित नहीं है।


फिल्मों का कमाना ना कमाना कितना मायने रखता है ?

मैंने बहुत सारी मेहनत की थी ब्योमकेश बक्सी के लिए जो फोर्टीज की कहानी थी। शुक्रवार को रिलीज हुई नहीं चली, शनिवार और रविवार को बिलकुल भी पैसे नहीं कमाई। सोमवार को मैं बिलकुल ठीक था। और ऐसा बिलकुल नहीं था कि मैं खुद को समझाने की कोशिश कर रहा था। वहीं एम एस धोनी रिलीज हुई 20 करोड़, 22 करोड़, 23 करोड़ कमा रही थी। सब पागल हो रहे थे। पर मैं फिर भी नॉर्मल था। ऐसा नहीं था कि मैं दुखी था, मैं खुश था पर सामान्य अवस्था में था।

पुर्नजन्म  में भरोसा करते हैं?

नहीं मैं पुर्नजन्म में भरोसा नहीं रखता हूं,  सच कहूं तो जिस धारणा पर आप विश्वास नहीं करते हो और वही स्क्रिप्ट की सेंट्रल प्लॉट हो तो उस पर काम करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन फिल्म की कहानी इतनी अच्छी है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पुर्नजन्म में विश्वास रखते हो या नहीं और यही वजह थी कि मैंने इस फिल्म को किया।


आप खुद को आउट साईडर मानते हैं?

हां मैं बाहर से हूं तो खुद को बाहरी समझता हूं। मैं टीवी से आया हुआ बंदा हूं। लोगों को लगता था ये कैसे आ गया। पर एक बात है मेरी फिल्में कमाएं या ना कमाएं पर लोग मुझे काम देते हैं क्योंकि लोग जानते हैं कि मैं मेहनती हूं।

एक बार फिर टीवी पर मानव देखने को मिलेगा ?

मानव तो देखने नहीं मिलेगा क्योंकि वह टीवी शो बंद हो गया है। लेकिन उससे संबंधित कैरेक्टर तो होंगे ही। पर एक और बात है अगर मुझे एकदम से समझ में आ गया कि मुझे क्या करना है, तो फिर वह चाहे कितनी भी अच्छी स्टोरी हो, कितने भी पैसे मिल रहे हों, कोई भी डायरेक्टर हो मैं नहीं करूंगा। इसके पीछे ऐसा नहीं है कि मुझे कोई प्वाइंट प्रूफ करना है कि मैं कितना अलग हूं।

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