पेड़ वाले बाबूजी

 Worli
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मुंबई के वर्ली हिल ईलाके में लगे हुए 1 लाख 24 हजार पेड़ इस समय वहां खड़े पर्यावरण की शोभा बढ़ा रहे हैं। यह संभव हुआ है मात्र प्रगत परिसर व्यवस्थापन (एएलएम) के कारण। ऐसा भी नहीं था कि यह पेड़ हमेशा से ही यहाँ की शोभा बढ़ा रहे थे। करीब 90 के दशक में यहां खड़ा होना भी दुभर हुआ करता था। यहां गंदगी का साम्राज्य हुआ करता था। गंदगी का आलम यह था कि स्थानीय लोग यहां सड़कों पर शौच करते थे। गंदगी के कारण लोग बीमारी का भी शिकार हुआ करते थे।

यहाँ एक स्थानीय निवासी राहमिन जैकब चरिकर रहा करते थे। चरिकर मानव मंदिर बिल्डिंग में रहते थे। एक बार यहाँ परदेशी मित्र मंडल के कुछ लोग आये। उनके लिए यहाँ खाने पीन के लिए भी व्यवस्था की गयी थी, लेकिन यहाँ की गंदगी को देखते हुए वे लोग होटल में रहने चले गये। यह बात चरिकर को अखर गयी। तब उन्होंने यहाँ साफ़ सफाई करने का निश्चय किया।

तब उन्होंने गांधीगिरी का मार्ग अपनाया। वे जब किसी छोटे बच्चे को रास्ते पर शौच करते देखते तो वे उसे चॉकलेट देते। सभी उन्हें पागल बोले लगे। लेकिन उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा। धीरे धीरे लोगों को समझ में आने लगा। लोगों ने रास्तों पर शौच करना बंद कर दिया।


आज राहमिन जैकब चरिकर 62 साल के हैं, और लोग उन्हें बाबूजी के नाम से बुलाते हैं। 1998 में जब प्रगत परिसर व्यवस्थापन (एएलएम) अस्तित्व में आया तब उन्होंने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। आज यहां स्थानीय लोकप्रतिनिधियों की सहायता से शौचालय बने हुए हैं।

मानव मंदिर गति परिसर के मार्गदर्शन में 1 लाख 24 हजार पेड़ लगाए गये हैं। आज इस ईलाके में साफ सफाई के साथ-साथ हरियाली भी नजर आती है। बाबूजी के इस कार्य में उनका साथ दे रहे हैं शिवराजां रायऐय्य अनुमल्ला उर्फ अण्णा (50), अण्णा भी पिछले 18 साल से बाबूजी के साथ पर्यावरण की रक्षा करने में जुटे हुए हैं।

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