2050 तक समुद्र में मछलियों से ज़्यादा प्लास्टिक - IIT Bombay प्रोफेसर की रिसर्च रिपोर्ट

रिपोर्ट कहती है की अगर ठीक इसी स्तर पर हम हर साल प्लास्टिक का इस्तेमाल करते रहे तो साल 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज़्यादा प्लास्टिक तैरता दिखाई देगी

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आईआईटी बॉम्बे के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर रंजीत विष्णुराधन और डिपार्टमेंट के हेड टी आई एल्डो द्वारा तैयार की गई एक रिसर्च रिपोर्ट के बाद ये बात सामने आई है की 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज़्यादा प्लास्टिक तैरता दिखाई देगा।ये रिसर्च बताती है की समुद्र में जमा हो रहे प्लास्टिक की वजह से ना केवल समुद्रीय जलिय जीवन को खतरा पैदा हो गया है बल्कि आने वाले वक्त में इसके बेहद खतरनाक परिणाम पर्यावरण को भी झेलने होंगे, इसके साथ ही इसके विपरीत परिणाम फ़ूड चैन में आये बदलाव की वजह से मनुष्यो के लिए भी बेहद बुरे साबित होने वाले है।

क्या कहती है रिपोर्ट

रिपोर्ट कहती है की अगर ठीक इसी स्तर पर हम हर साल प्लास्टिक का इस्तेमाल करते रहे तो साल 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज़्यादा प्लास्टिक तैरता दिखाई देगी। रिपोर्ट बताती है की कुल प्लास्टिक उत्पादन का 50% हिस्सा सिंगल यूज़ प्लास्टिक का होता है। इनमे मौजूद मीथेन और ईथीलीन सोलर रेडिएशन की वजह से ग्रीन हाउस गैसेस का पैदा करती है जिससे आने वाले सालो में पर्यावरण पर बेहद विपरीत असर देखने के लिए मिलेंगे।

प्रो. विष्णुराधन के अनुसार दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1950 से दुनिया में प्लास्टिक का उपयोग तेजी से बढ़ा है । 1950 में प्लास्टिक का ग्लोबल उत्पादन 1.5 मिलियन मैट्रिक टन था वही 2018 आते आते ये उत्पादन 350 मिलियन मैट्रिक टन हो गया है और इस 350 मिलियन मैट्रिक टन का भी आधा प्लास्टिक पिछले 10 सालो में उत्पादित किया गया है।एक बार उपयोग में लाये जाने के बाद इनमे से आधा प्लास्टिक हमारी नज़रो के सामने से गायब हो जाता है लेकिन अब सवाल उठता है की ये आखिर जाता कहा है ? इसी प्लास्टिक को समुद्र में डाल दिया जाता है, जो आनेवाले समय में पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। 

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