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आख़िरकार मुंबई में गणेशोत्सव समाप्त हो ही गया। बताया जा रहा है कि इस बार मुंबई में 20 फीसदी अधिक लोगों ने बाप्पा को स्थापित किया था, यानी 20 फीसदी अधिक संख्या में मूर्तियों की बिक्री हुई, जिसमें घरेलू गणपति की संख्या 30 हजार जबकि सार्वजानिक मूर्तियों की संख्या में 2 हजार की वृद्धि हुई।

तो शायद आंकड़ा और भी अधिक होता 
अगर पिछले साल की बात करें तो 11 दिनों में 11098 सार्वजनिक मूर्तियों की बिक्री दर्ज की गयी थी जबकि इस बार यह आंकड़ा बढ़ कर 13347 पर पहुंच गया। इसका मतलब पिछली बार से इस बार 2249 मूर्तियां अधिक बिकीं।
गौरतलब है कि इस बार बीएमसी ने कई अवैध मंडलों को मंजूरी नहीं दी थी। जिससे मंडलों में काफी नाराजगी थी। अगर सभी मंडलों को मंजूरी मिली होती तो शायद यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता था।

विसर्जन स्थलों से पता चल आंकड़ा 
इन मूर्तियों के विसर्जन के लिए चौपाटी के साथ 69 प्राकृतिक तालाबों के अलावा 31 कृत्रिम तालाब भी बनाये गए थे, इन विसर्जन स्थलों पर जितने भी मूर्तियां विसर्जन के लिए आईं और उससे जो आंकड़े जुटाए गए उससे पता चला कि इस बार घरेलू गणपति की संख्या में वृद्धि हुई है।

10 फीसदी घरेलू गणपतियों में हुई वृद्धि 
पिछले साल सभी विसर्जन स्थलों पर 1लाख 91हजार 254 घरेलू गणपतियों का विसर्जन हुआ था जबकि इस बार 2लाख 22हजार 26  घरेलू गणपतयों का विसर्जन हुआ। इसका मतलब इस बार 10 फीसदी यानी 30772 घरेलू गणपतियों की संख्या में वृद्धि हुई।

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