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सायन अस्पताल में कोरोना टीका का परीक्षण, 1 हजार स्वयंसेवकों ने लिया भाग

अमेरिका का ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा 'काउशिल्ड वैक्सीन' पर काम चल रहा है। वर्तमान में इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल चल रहा है

सायन अस्पताल में कोरोना टीका का परीक्षण, 1 हजार स्वयंसेवकों ने लिया भाग
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कोरोना के वायरस (Corona virus) को फैलने से रोकने के लिये दूनिया भर के देशों में टेस्ट चल रहे हैं। इस बीमारी को समाप्त करने के लिए अभी तक कोई पेटेंट दवा भी विकसित नहीं की गई है हालांकि कुछ देशों और कंपनियों ने कोरोना की वैक्सीन बनाने का दावा जरूर किया है।

भारत में भी वैक्सीन बनाने का कार्य जोरों पर है। इसी कड़ी में पिछले कुछ दिनों से BMC के केईएम (kem hospital), नायर अस्पताल (nair hospital) में कोरोना वैक्सीन (corona vaccine) का परीक्षण किया जा रहा है। 5 दिसंबर को सायन अस्पताल में भी कोरोना वैक्सीन का परीक्षण किया गया।

इस वैक्सीन को भारत बायोटेक (bharat biotech) द्वारा विकसित किए गए 'कोवैक्सीन' टीका को राज्य सरकार की एथिक कमिटी द्वारा मजूरी दी गई थी। इसके बाद सायन अस्पताल में 'कोवैक्सीन' के लिए टेस्ट शुरू हुए हैं।

कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार को रोकने के लिए दुनिया भर में टीके विकसित किए जा रहे हैं। अमेरिका का ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा 'काउशिल्ड वैक्सीन' पर काम चल रहा है। वर्तमान में इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल चल रहा है कि, कहीं इस टीके का मनुष्यों पर परीक्षण के दौरान कोई दुष्प्रभाव तो नहीं पड़ेगा? 

एक ओर, केईएम और नायर अस्पतालों में कोविशिल्ड वैक्सीन का अध्ययन चल रहा है। तो दूसरी ओर, सायन अस्पताल में भारत बायोटेक के कोवैक्सीन टीका का परीक्षण शुरू किया गया है। सायन अस्पताल में एक हजार स्वयंसेवकों ने खुद जाकर कोरोना के टेस्ट के लिए खुद को रजिस्टर्ड कराया। यह टेस्ट शनिवार 5 दिसंबर से लेकर 15 दिसंबर तक चलेगा।


'वैक्सीन' इस प्रकार दी जाएगी...

  • भारत बायोटीकची कोवॅक्सिन लस दिली जाते. 
  • भारत बायोटिक का कोवैक्सीन टीका दिया जा रहा है।
  • टीका लगाने के बाद स्वयंसेवक को कम से कम आधे घंटे के लिए अस्पताल में ही आराम करने के लिए कहा जाता है।
  • स्वयंसेवक डॉक्टरों की देखरेख में रहते हैं।
  • अगर कोई समस्या नहीं है, तो उन्हें घर भेज दिया जाता है।
  • स्वयंसेवकों के घर जाने के बाद भी, उनकी निगरानी डॉक्टरों द्वारा की जाती है।

    स्वयंसेवकों के घर जाने के बाद भी, उनकी निगरानी डॉक्टरों द्वारा की जाती है।

  • स्वयंसेवकों के घर जाने के बाद भी, उनकी निगरानी डॉक्टरों द्वारा की जाती है।
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