सरकारी 'मर्म' रखेगा टीबी के मरीजों का ध्यान


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टीबी के मरीजों को डॉट्स सेंटर पर दवाइयां दी जाती हैं। लेकिन ये मरीज समय-समय पर दवाइयां लेते हैं या नहीं इस पर नजर रखने के लिए राज्य सरकार ने 'मेडिकेशन इवेंट एंड मॉनिटर रिमाइंडर' (मर्म) नामसे एक शुरू की है। इस योजना के द्वारा डॉट्स सेंटर में रजिस्टर्ड मरीजों की देखभाल की जायेगी। 

टीबी लाइलाज बीमारी नहीं
एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉट्स सेंटरों पर रजिस्टर्ड कुल मरीजों में से लगभग 2 मरीज ऐसे होते हैं जो आधे कोर्स में ही दवा लेना बंद कर देते हैं। इसे रोकने के लिए ही 'मर्म' योजना शुरु की गयी है। पहले टीबी एक लाइलाज बीमारी थी, लेकिन अब डॉट्स सेंटर पर नियमित दवा लेने और नियमित उपचार कराने पर यह बीमारी ठीक हो सकती है। 


मरीजों को लापरवाही पड़ती है भारी 
आपको बता दें कि ऐसे कई टीबी के मरीज हैं जो नियमित दवा लेते हैं और जब उन्हें लगता है कि वे ठीक हो रहे हैं तो वे दवा लेने में आनाकानी करने लगते हैं। इसके बाद फिर से टीबी के वायरस शरीर में पनपने लगते हैं। लेकिन सरकार की इस योजना के अंतर्गत 'मर्म' टीबी के मरीजों की एक बॉक्स देगा जिसमें एक चिप लगी होगी। यह चिप डॉट्स सेंटर से कनेक्ट होगी। जिसमें मरीजों की सारी डिटेल्स उपलब्ध होगी।



कैसे काम करेगा 'मर्म'
'मर्म' से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया कि मुंबई में इस समय कुल 99 डॉट्स सेंटर हैं। टीबी का मरीज अपने नजदीकी डॉट्स सेंटर में रजिस्टर्ड होगा। सेंटर की तरफ से जो बॉक्स मरीजों को दिया जायेगा उसमे एक चिप लगी होगी जो डॉट्स सेंटर से कनेक्ट होगी। जैसे ही मरीज दवा लेने के लिए बॉक्स खोलेगा वैसे ही एक मिस कॉल डॉट्स सेंटर पर चली जाएगी। जिससे मरीज को कौन सी दवा कितनी लेनी है उसकी हर जानकारी समय पर मिल जाएगी। इतना ही नहीं दवा लेने का जब समय होगा तब इस बॉक्स में से अपने आप अलार्म बजने लगेगा।

'मर्म' से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मुंबई में पहले प्रायोगिक तौर पर इस योजना को शुरू किया गया है अगर इससे लोगों को फायदा पहुंचता है तो इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जायेगा।
डॉ. संजीव कांबले, केंद्रीय क्षयरोग नियंत्रण अधिकारी

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