अब नायर अस्पताल में भी नवजात को मिलेगा मां का दूध

एक आकड़े के मुताबिक दुनियांभर में तकरीबन हर साल 16 लाख बच्चों की मौत सिर्फ इसलिये होती है क्योकी उन्हे पैदा होने के बाद मां का दुध नहीं मिल

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बीएमसी के सायन और केईएम अस्पताल के बाद अब नायर अस्पताल में भी नवजात बच्चों के लिए मां के दूध की व्यवस्था की गई है। अस्पताल में ‘कांगारू मदर केअर’ नाम की एक सुविधा भी शुरु की गई है। इस सुविधा में उन नवजात बच्चो को मां का दूध दिया जाएगा जिन्हे किसी कारण की वजह से पैदा होने के बाद मां की दूध नहीं मिल पाता है ।


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हर साल 16 लाख बच्चों की हो जाती है मौत

एक आकड़े के मुताबिक दुनियांभर में तकरीबन हर साल 16 लाख बच्चों की मौत सिर्फ इसलिये होती है क्योकी उन्हे पैदा होने के बाद मां का दूध नहीं मिलता। पुरी दुनियां में 517 मातृदूग्ध बैंक कार्य करती है, भारत में ऐसे कुल 13 बैंक है। मुंबई में जे.जे अस्पताल, सायन, राजावाड़ी और केईएम अस्पताल में ये बैंक कार्य करते है , लेकिन अब नायर अस्पताल में भी इस सुविधा की शुरुआत की जाएगी।

दर हिन 3 से 4 लिटर दूध की आवश्यकता

पैदा होने के बाद जिन बच्चों का मां का दूध नहीं मिल पाता है उन्हे गाय का दूध या फिर पावडर का दूध दिया जाता है। इन दूध को पहले उबाला जाता है फिर उन्हे ठंडा करके बच्चे को दिया जाता है। बच्चे को दिन में तीन से चार बार दूध की जरुरत पड़ती है


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कैसे करते है दूग्धबैंक कार्य

गर्भवती महिलाओ से दूध को जमा किया जाता है , फिर उन्हे अच्छी तरह से उबाला जाता है। दूध उबालने के बाद जिन बच्चे की मां उन्हे जन्म देते ही गुजर जाती है या ऐसे बच्चे जिनकी मां किसी कमजोरी के कारण बच्चे को दूध नही पिला सकती है , ऐसे बच्चो को ये दूध दिये जाते है।


नायर अस्पताल के बालरोग विभाग के प्रमुख डॉ. सुषमा मलिक का कहना है की बच्चे के पैदा होने के बाद कई बार बच्चे को तुरंत मां का दूध चाहिये । ऐसे दुग्धबैंको की मदद से मां का दिया हुआ दूध जमा किया जाता है। हर महिने अस्पताल में 32 से 40 महिलाए ऐसी आती है जिन्हे बच्चा पैदा होने के बाद पूरा दूध नहीं आता है।

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