क्या होती है जेनेरिक दवा, इतनी सस्ती क्यों होती है...?

 Mumbai
क्या होती है जेनेरिक दवा, इतनी सस्ती क्यों होती है...?
क्या होती है जेनेरिक दवा, इतनी सस्ती क्यों होती है...?
See all

मरीजों को सस्ती दवा मिले इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने कानूनी ढांचा लाने की प्रक्रिया में है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत डॉक्टरों को मरीजों के लिए जेनेरिक दवा लिखना अनिवार्य हो जाएगा। अब तक डॉक्टर मरीजों के लिए जो दवा बाहर वाली लिखते थे वह काफी महंगी तक होती थी।
इसके पहले भी इंडियन मेडीकल कौन्सिल ने मॉडल प्रिस्क्रिप्शन एक्ट के अंतर्गत जेनेरिक दवा लिखने का आदेश दिया था लेकिन डॉक्टरों ने इस आदेश का पालन नहीं किया। अब केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये गये जन औषधी परियोजना के अंतर्गत डॉक्टरों को जेनेरिक दवा लिखना जरुरी है। बोरीवली में जेनेरिक दवा के जन औषधी केंद्र चलाने वाले विजय घौसर का कहना है कि मुंबई में केवल 3 तो पूरे महाराष्ट्र में 80 जन औषधी केंद्र है। घौसर ने विश्वास जताया है कि अब पीएम मोदी की घोषणा के बाद जेनेरिक दवाओं के सभी डॉक्टर कानून का पालन करेंगे और लोगों में जागरूकता भी फैलेगी।

क्या डॉक्टर बदलेंगे ?

जेनेरिक दवाओं को लिखने में 90 फीसदी डॉक्टर आनाकानी करते हैं, तो क्या अब पीएम मोदी की घोषणा के बाद तस्वीर बदलेगी। जब इस बाबत इंडियन मेडीकल कौन्सिल के सदस्य डाँ. शिवकुमार उत्तुरे से जवाब माँगा गया तो पहले तो उन्होंने इस निर्णय का स्वागत किया फिर इस बारे में और भी काम किये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूरे मुंबई में बहुत कम मात्रा में जन औषधि केंद्र हैं, अभी जरुरत है तो मात्र इसके लिए जरुरी इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण करने की। उन्होंने कहा कि अभी लोग केमिस्ट के पास दवा लेने जाते हैं अगर कोई मरीज दवा लेने गया और मेडिकल वाले ने जेनेरिक दवा के बदले कोई दूसरी कम्पनी की दवा दे दी और मरीज को कुछ हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। इसके लिए पहले लोगों को प्रशिक्षित करना होगा।

फार्मासिस्ट को अधिकार मिले :

महाराष्ट्र रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट असोसिएशन के अध्यक्ष कैलास तांदले ने कहा कि डॉक्टरों सहित फार्मासिस्टों को भी दवा लिखने का अधिकार मिले। प्रस्तावित नियम में संसोधन होना चाहिए।

मुंबई–ठाणे में यहां मिलती हैं जेनेरिक दवा –
जन औषधि घाटकोपर सेवा संघ, चिराग नगर पोलिस स्टेशन, एलबीएस मार्ग, घाटकोपर
जन औषधि केंद्र, भगवती हॉस्पिटल, बोरिवली पश्चिम
जन औषधि केंद्र, 2-आम्रपाली बिल्डींग, सोमवारी बाजार, मालाड पश्चिम
जन औषधि केंद्र शॉप नं. 19 राजयोग फेस -1, म्यून्सिप्ल हाँस्पीटल, नालासोपारा, पूर्व
जन औषधि केंद्र, गाला, नंबर, डी-6, सिद्धिविनायक सोसायटी, सावरकरनगर, ठाणे पश्चिम
जन औषधि केंद्र, शॉप नंबर-5 शिवप्लाझा काँप्लेक्स, नेहरू चौक, उल्हासनगर
जन औषधि केंद्र, सिताराम पैलेस, शॉप नं.-2 शिरोडकर हॉस्पिटल ट्रस्ट, मानपाडा रोड, डोंबिवली पूर्व

क्या होती है जेनेरिक दवा-

किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्टडी के बाद एक रसायन (साल्ट) तैयार किया जाता है जिसे आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए दवा की शक्ल दे दी जाती है। इस साल्ट को हर कंपनी अलग-अलग नामों से बेचती है। कोई इसे महंगे दामों में बेचती है तो कोई सस्ते। लेकिन इस साल्ट का जेनेरिक नाम साल्ट के कंपोजिशन और बीमारी का ध्यान रखते हुए एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। किसी भी साल्ट का जेनेरिक नाम पूरी दुनिया में एक ही रहता है।

सस्ती दवाएं मिल सकती हैं-

आमतौर पर डॉक्टर्स महंगी दवाएं लिखते हैं इससे ब्रांडेड दवा कंपनियां खूब मुनाफा कमाती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं आप डॉ. की लिखी सस्ती दवाएं भी खरीद सकती हैं। जी हां, आपका डॉक्टर आपको जो दवा लिखकर देता है उसी साल्ट की जेनेरिक दवा आपको बहुत सस्ते में मिल सकती है। महंगी दवा और उसी साल्ट की जेनेरिक दवा की कीमत में कम से कम पांच से दस गुना का अंतर होता है। कई बार जेनरिक दवाओं और ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में 90 पर्सेंट तक का भी फर्क होता है।

क्यों सस्ती होती हैं जेनेरिक दवाएं-

जहां पेंटेट ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं वहीं जेनेरिक दवाओं की कीमत को निर्धारित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप होता है। जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, डॉक्टर्स अगर मरीजों को जेनेरिक दवाएं प्रिस्क्राइब करें तो विकसित देशों में स्वास्थय खर्च 70 पर्सेंट और विकासशील देशों में और भी अधिक कम हो सकता है।

इन बीमारियों की जेनेरिक दवा होती है सस्ती-

कई बार डॉक्टर सिर्फ साल्ट का नाम लिखकर देते हैं तो कई बार सिर्फ ब्रांडेड दवा का नाम। कुछ खास बीमारियां हैं जिसमें जेनेरिक दवाएं मौजूद होती हैं लेकिन उसी सॉल्ट की ब्रांडेड दवाएं महंगी आती हैं। ये बीमारियां हैं जैसे- हार्ट डिजीज, न्यूरोलोजी, डायबिटीज, किडनी, यूरिन, बर्न प्रॉब्लम. इन बीमारियों की जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में भी बहुत ज्यादा अंतर देखने को मिलता है।

कैसे पता करें जेनेरिक और ब्रांडेड दवा में अंतर-

एक ही साल्ट की दो दवाओं की कीमत में बड़ा अंतर यूं तो जेनेरिक दवा का सबूत हो सकता है लेकिन इसके लिए कई मोबाइल ऐप जैसे Healthkart plus और Pharma Jan Samadhan भी मौजूद हैं। इनके जरिए आप आसानी से सस्ती दवाएं खरीद सकते हैं।

Loading Comments