प्रजा फाउंडेशन ने बीएमसी अस्पतालों में कम वजन वाले बच्चों की संख्या मे 84 फीसदी की गिरावट पर खड़े किये सवाल

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के आंकड़ों के मुताबिक2016-17 में 73,112 बच्चे कम वजन का शिकार थे तो वही 2017-18 में सिर्फ 11,720 बच्चे कम वजन का शिकार है।

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प्रजा फाउंडेशन की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी स्कूलों में पढ़ रहे 10 प्रतिशत बच्चे दांत या फिर त्वाचा की समस्याओं से परेशान है। इसके साथ ही बच्चो में विटामिन की कमी भी पाी गई है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के आंकड़ों के मुताबिक2016-17 में 73,112 बच्चे कम वजन का शिकार थे तो वही 2017-18 में सिर्फ 11,720 बच्चे कम वजन का शिकार है।


प्रजा ने खड़े किये सवाल

परिणाम प्राप्त करने के लिए 2.3 लाख से अधिक बच्चों की जांच की गई। प्रजा के ट्रस्टी निताई मेहता ने इन आकड़ो पर सवाल खड़ा करते हुए कहा की ' यह आकड़ा अपने आप में सवाल खड़ा करता है , यह कैसे संभव है कि बीएमसी कम वजन वाले मामलों में इतनी बड़ी कमी हासिल कर सके?।

आरटीआई से मिली जानकारी

आरटीआई के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, कक्षा 1 से 5वीं के बीच पढ़ रहे 37 प्रतिशत बच्चे 2015 से 2017 तक कम वजन वाले थे, इस साल यह आंकड़ा 5 फीसदी हो गया। गोविंडी समेत एम (ईस्ट) वार्ड, 2016-17 में 24,244 बच्चो और 2017-18 में 2,215 के साथ अंडरवेट बच्चों की संख्या कम हो गई है।

जूनियर और सीनियर के छात्रों के वजन की स्क्रिनिंग नहीं

प्रजा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मिलिंद मास्के के मुताबिक, बीएमसी जूनियर और सीनियर के छात्रों के वजन की स्क्रिनिंग नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में कुपोषण का सामना सबसे अच्छे तरीके से किया जा सकता है लेकिन बीएमसी इसपर ध्यान नहीं देती है।

आंकड़ों से यह भी पता चला है कि बच्चों को दांत और त्वचा से संबंधित बीमारियों का सामना सबसे ज्यादा करना पड़ता है। 2017-18 में, 21,240 छात्रों को त्वचा की समस्याएं थीं और 23,444 दांतों की समस्याएं थीं।


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