मुंबई में स्वाइन फ्लू के 9 मरीज, जानें बचाव के उपाय

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    मुंबई में स्वाइन फ्लू के 9 मरीज, जानें बचाव के उपाय
    मुंबई  -  

    राज्य सहित मुंबई में स्वाइन फ्लू के मरीज बढ़ते जा रहे हैं।अब तक मुंबई में स्वाइन फ्लू के अलग अगल अस्पतालों में 9 मरीज मिले हैं, जबकि राज्य भर में कुल 103 मरीज। लगातार बदल रहे वातावरण से भी स्वाइन फ्लू को बढ़ने का अवसर मिलता है। राज्य भर में स्वाइन फ्लू के मरीज बढ़ रहे हैं लेकिन प्रशासन कान में तेल डाले बैठी है।

    डॉ.मिनी खेत्रपाल का कहना है कि मुंबई के अलग अलग अस्पतालों में 9 मरीज मिले हैं। उनका ईलाज चल रहा है। फरवरी में स्वाइन फ्लू के 2 मरीज, मार्च में 5 और अप्रैल में 2 मरीज अस्पताल में मिले हैं। खेत्रपाल ने कहा कि हमने पालिका के सभी अस्पतालों में इससे सम्बंधित गाइड लाइन भेज दी है। आपातकाल के लिए वेंटिलेटर भी तैयार है। उन्होंने आगे कहा कि स्वाइन फ्लू को लेकर जनजागृति भी फैलाई जा रही है। गर्भवती माहिला,छोटे बच्चे और बुजुर्ग इससे अधिक प्रभावित होते है इसीलिए इन्हें और भी सजग रहने की जरूरत है।

    क्या है स्वाइन फ्लू?
    स्वाइन फ्लू , इनफ्लुएंजा पिग इनफ्लुएंजा, हॉग फ्लू या फिर पिग फ्लू भी कहते हैं। इस वायरस को ही H1N1 कहा जाता है। इसके इनफेक्शन ने 2009 और 10 में महामारी का रूप ले लिया था-लेकिन WHO ने 10 अगस्त 2010 में इस महामारी के खत्म होने का भी ऐलान कर दिया था। अप्रैल 2009 में इसे सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया था। तब इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से ये मिलता-जुलता था।

    क्या है स्वाइन फ्लू के लक्षण ?
    स्वाइन फ्लू के लक्षण भी सामान्य एन्फ्लूएंजा जैसे ही होते हैं
    -नाक का लगातार बहना, छींक आना
    -कफ, कोल्ड और लगातार खांसी
    -मांसपेशियां में दर्द या अकड़न
    -सिर में भयानक दर्द
    -नींद न आना, ज्यादा थकान
    -दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढ़ना
    -गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
    स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फैलता है। कई बार मरीज के आसपास रहने वाले लोगों और तिमारदारों को चपेट में ले लेता है। लिहाजा, किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखना चाहिए, स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे भी नहीं छूना चाहिए।

    कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू?
    -स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है
    -खांसने, छींकने, थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है
    डॉक्टरों का ये भी कहना है कि अगर किसी घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया तो, घर के बाकी लोगों को इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह ले कर खुद भी इसकी दवाईयां खानी चाहिए।

    स्वाइन फ्लू से बचने के उपाय
    स्वाइन फ्लू से बचाव इसे रोकना का बड़ा उपाय है, हालांकि इसका इलाज भी अब मौजूद है। आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर है। शुरुआत में पैरासीटमॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी के बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है। लेकिन इन दवाओं को कभी भी खुद से नहीं लेना चाहिए।

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