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महा'रेरा' का उल्लंघन करने के मामले में सिडको के खिलाफ दूसरी शिकायत की गयी है, और यह शिकायत की है महाराष्ट्र चेंबर आॅफ हाऊसिंग इंडस्ट्रीज (MCHI) की रायगढ़ शाखा ने।अब MCHI के अध्यक्ष अतीक खातू का कहना है कि प्राइवेट बिल्डरों की तरह सिडको पर भी कार्रवाई हो।


 
क्या था मामला?
आपको बता दें कि प्राइवेट बिल्डरों की तरफ म्हाडा और सिडको भी महा'रेरा' नियमों के अंतर्गत आते हैं। इन्हें भी अपने प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन महा'रेरा' में कराना अनिवार्य है। यही नहीं नियमों के मुताबिक सिडको हो या म्हाडा या फिर प्राइवेर बिल्डर, अभी को विज्ञापन में भी रेरा का रजिस्टर्ड नंबर प्रकाशित कराना अनिवार्य है लेकन सिडको ने इन सभी नियमों का उल्लंघन किया। सिडको ने घर तो बना लिया लेकिन विज्ञापन में रेरा रजिस्टर्ड नंबर प्रकाशित नहीं किया था। जब सवाल उठने लगे तो सिडको ने मात्र कुछ ही घंटों में रेरा से रजिस्टर्ड भी करवा लिया।

नियमों का किया उल्लंघन 
शिकायतकर्ता अतीक खातू ने यह भी आरोप लगाया कि यही नहीं सिडको ने कलंबोली और खारघर में 9 प्लाटों  की बिक्री यानि नीलामी के लिए अगस्त महीने में विज्ञापन निकाला था लेकिन इस विज्ञापन में भी रेरा का रजिस्टर्ड नंबर प्रकाशित नहीं किया गया था, जबकि इन प्लाटों का रेरा में रजिस्ट्रेशन आवश्यक था।

 क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?

खातू ने यह भी कहा कि महा'रेरा' विभाग किसी प्राइवेट बिल्डर पर जितनी फुर्ती से कार्रवाई करता है उतनी फुर्ती से सिडको पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। उन्होने कहा कि शिकायत किए हुए एक साल से अधिक हो गया लेकिन अभी तक सिडको पर कुछ भी कार्रवाई नहीं हुई।

पहले भी दर्ज हो चुकी है शिकायत 
आपको बता दें कि इसके पहले मुंबई ग्राहक पंचायत की तरफ से एडवोकेट शिरीष देशपांडे ने भी इसकी शिकायत मह'रेरा' से की थी लेकिन अभी तक उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

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