बीपीटी की जमीन पर ट्रांजीट कैंप?


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गुरुवार को भिंडी बाजार में हुए हादसे के बाद म्हाडा की ऊंची इमारतों में रहने वाले प्रवासियों के सामने एक बार फिर से सवाल खड़ा हो गया है। कई नोटीस मिलने के बाद भी निवासी अभी भी उसी पूरानी इमारतो में रहते है। स्थानिय लोगों को संदेह है की उन्हे दूर ट्रांजिट कैंप में शिफ्ट किया जाएगा या फिर उन्हे घर नहीं दिया जाएगा।

हालांकि, अब राज्य सरकार ने दक्षिण मुंबई के निवासियों के लिए ट्रांजित कैंप उपलब्ध कराने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। राज्य सरकार केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली 100 एकड़ बीपीटी जमीन को पाने की कोशिश कर रही है।

दरवाजे पर मौत ...

दक्षिण मुंबई में म्हाडा की ऐसी कई इमारतें है जो जर्जर इमारतों की सुची मे है। इस बात की कोई गारंटी नहीं ले सकता की ये इमारतें कब गिर जाएगी। गुरुवार को भिंडी बाजार में हुए हादसे के कारण 34 लोगों की मौत हो गई। गोराई में 1000 ट्रांजीट कैंप बनाए गए है लेकिन दक्षिण मुंबई में रहनेवालों का कहना है की अपने नौकरी, बच्चो की पढाई को छोड़कर उतनी दूर कैसे जाया जा सकता है।

मुंबई में कोई भी गाला खाली नहीं
म्हाडा की मुंबई भवन मरम्मत और पुनर्निर्माण बोर्ड का कहना है की शहर में ट्रांजीट कैंप कम है जिसके कारण निवासियो को उपनगर के ट्रांजीट कैंप मे शिफ्ट किया जा रहा है। मुंबई में करीब 56 ट्रांजिट कैंप हैं लेकिन इन ट्रांजीट कैंप में से कई पूराने हो गये है। जिसके कारण मौजूदा समय में मुंबई भवन मरम्मत और पुनर्निर्माण बोर्ड के पास एक भी ट्रांजीट कैंप खाली नहीं है। एक आकड़े के अनुसार भविष्य में कम से कम 25,000 परिवारों को पलायन करने की आवश्यकता होगी।

बीपीटी भूमि के 100 एकड़ जमीन लेने की कोशिश

सोमवार को मुंबई भवन और पुनर्निर्माण बोर्ड के मुख्य अधिकारी सुमति भांगे ने बताया कि राज्य सरकार शहर में बड़ी संख्या में ट्रांजिट कैंपों के लिए 100 एकड़ बीपीटी स्पेस लेने की कोशिश कर रही है। जिसके लिए केंद्र सरकार से बातचीत जारी है, अगर केंद्र सरकार ये जमीन दे देती है तो यहां पर काफी सारे ट्रांजीट कैंप बनाए जा सकते है।

रवींद्र वायकर का आश्वासन
शुक्रवार को गृहनिर्मा राज्य मंत्री श्रविंद्र वाकर ने हुसैनिवाला इमारत की दुर्घटना की पृष्ठभूमि में बीपीटी की जमीन पर चर्चा की। वायकर ने कहा कि इस समय उन्होंने इस जमीन को प्राप्त करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए है। वायकर ने आश्वासन दिया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ वो एक बैठक भी करेंगे। हालांकी इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन साल का समय लग सकता है ।


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