मुंबई लाइव इम्पैक्ट : राज्य सरकार ने एसआईटी गठन कर दिए जांच के आदेश


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मुंबई लाइव ने प्रमुखता से यह खबर प्रकाशित की थी कि किस तरह से बिल्डरों ने म्हाडा को 14 हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया है। 1992-93 से बिल्डरों ने 33(7) के अंतर्गत इमारतों के पुनर्विकास में प्रयुक्त किए गये FSI से म्हाडा को अँधेरे में रखा जिससे म्हाडा को करोड़ो रुपए का नुकसान हुआ। मुंबई लाइव की खबर के बाद राज्य सरकार की नींद खुली। इस मामले में गृह निर्माण राज्यमंत्री रविन्द्र वायकर ने इस मामले में एसआईटी गठन करने का निर्देश दिया।


मुंबई लाइव से बात करते हुए वायकर ने कहा कि इस प्रकरण में रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी थी जिसमें ठोस कार्रवाई करने का कोई उल्लेख नहीं था इसीलिए जांच के लिए एसआईटी गठन करने का निर्देश दिया गया। जांच में जो दोषी पाया जाएगा उसपर कर्रवाई की जाएगी चाहे वह बिल्डर हो या म्हाडा का अधिकारी।

क्या था मामला ?

मुंबई शहर में उपकर (सेस) भरने वाली पुरानी इमारतें पुनर्विकास में बिल्डरों ने म्हाडा अधिकारीयों के साथ घालमेल करके म्हाडा को चूना लगाया था। 1992-93 से 432 बिल्डरों ने 33(7) के अंतर्गत आने वाली इमारतों के पुनर्विकास में FSI नहीं दिया था। सेस भरने वाली पुरानी इमारत के पुनर्विकास में अतिरिक्त FSI डीसीआर 33(7) नियम के अनुसार सेस म्हाडा को देना पड़ता है, लेकिन 1992-93 से 379 इमारतों के पुनर्विकास का फायदा अभी तक म्हाडा को नहीं मिला।

इन इमारतों में मिलने वाले FSI (सेलेबल) 30 लाख स्क्वायर मीटर म्हाडा को मिलना चाहिए था जो म्हाडा को नहीं मिला। जिसकी बाजार कीमत लगभग 14 हजार करोड़ रुपए है। जबकि 1992-93 से बिल्डरों से FSI या फिर फ़्लैट म्हाडा ने वापस लेने का प्रयत्न भी नहीं किया। इस मामले में बिल्डरों के साथ म्हाडा के अधिकारियों की भी मिलीभगत है। गृह निर्माण विभाग को दिए गये रिपोर्ट में म्हाडा के अधिकरियों को इन आरोपों से बाहर रखा गया है।


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