15699 शराब बिक्री की दुकानें होंगी बंद, 7000 करोड़ का होगा नुकसान'

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15699 शराब बिक्री की दुकानें होंगी बंद, 7000 करोड़ का होगा नुकसान'

मुंबई - राष्ट्रीय राजमार्ग और हाइवे के किनारे आपको शराब नहीं मिलेगी। शुक्रवार को शराब की दुकानों की दूरी 500 मीटर से घटाकर 220 मीटर कर दी गयी। उच्चतम न्यायालय ने राजमार्गों के किनारे 20,000 से अधिक की आबादी वाले क्षेत्रों में शराब की दुकानों की दूरी को 500 मीटर से घटाकर 220 मीटर कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अन्य इलाकों में राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों के किनारे 500 मीटर तक की परिधि में शराब की दुकानों पर प्रतिबंध का उसका 15 दिसंबर का फैसला मान्य होगा। इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्पादन शुल्क मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि दिसंबर तक रिन्यूअल लाइसेंस दिसंबर के बाद रद्द हो जाएंगे। जिसमें 25 हजार में से 15 हजार 699 लाइसेंस रद्द होने की संभावन है। जिन्हें राज्य और राष्ट्रीय महामार्गों से डिनोटीफाय किया जाना है। सर्वोच्च न्यायलय के निर्णय से राज्य को 7000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा। 15699 शराब बिक्री करने वाली दुकानों, रेस्टॉरेंट, हॉटेल्स नए लायसेंन्स के लिए महामार्ग से 500 मीटर्स के बाहर की जगह के लिए अर्ज किया तो उनसे बिना फीस लिए लाइसेंस दिया जाएगा।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदेश?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हाइवे के नजदीक बार और रेस्टोरेंट में शराब परोसने पर लगी पाबंदी बरकरार रहेगी। पिछले दिनों हाईवे के 500 मीटर के दायरे में कोई शराब की दुकान नहीं होने के मामले की केंद्र और राज्यों के शराब संघों ने दूरी को कम करने की मांग की थी।
तीन जजों की पीठ में शामिल जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एलएन राव की ओर से कहा गया कि हाइवे पर शराब की दुकानों के लेकर अहम फैसला वहां होने सड़क हादसों और शराब पीकर गाड़ी के मामलों को देखते हुए लिया गया है। कोर्ट की ओर से साफ कर दिया गया कि एक अप्रैल से राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रदेश हाइवे के 500 मीटर के दायरे में स्थित सभी शराब की दुकानें हटा दी जाएं। एक अप्रैल 2017 से हाईवे पर इस तरह की दुकानें नहीं होंगी। 15 दिसंबर 2016 के फैसले के मद्देनजर एक अप्रैल से हाइवे में सभी शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा। आपको बता दें की सुप्रीम कोर्ट ने ने 15 दिसंबर 2016 को राज्य सरकारों को हाईवे के 500 मीटर के दायरे वाली शराब की दुकानों के लाइसेंस एक अप्रैल के बाद नवीनीकृत नहीं करने का आदेश दिया था।

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