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नारायण राणे ने फिर से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की वकालत की


नारायण राणे ने फिर से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की वकालत की
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BJP नेता नारायण राणे (narayan rane) ने एक बार फिर से अपनी बात दोहराते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन (president rule in maharashtra) लगने की वकालत की है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) को घेरते हुए उन पर कई आरोप लगाए।

एक प्रेसवार्ता में नारायण राणे ने सोमवार को कहा कि, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में कोरोना वायरस (Coronavirus) के संकट से निपटने में पूरी तरह से 'विफल' हैं। साथ ही राणे ने यह भी कहा कि, ने राज्य को नोकरशाह चला रहे हैं।

राणे ने आरोप लगाते हुए कहा कि, उद्धव ठाकरे ने पिछले चार महीने में लगे लॉकडाउन (lockdown) के दौरान राज्य को दस साल पीछे ले कर चले गए हैं।

राणे ने कहा, मैं कोरोना वायरस (Covid-19) संकट के मद्देनजर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की अपनी मांग पर अभी भी कायम हूं।

उन्होंने आगे कहा कि,  पिछले कुछ महीनों से मुख्यमंत्री मंत्रालय नहीं आते हैं, यदि मंत्रालय में मुख्यमंत्री ही नहीं है तो राज्य में सरकार का क्या अस्तित्व है।

राणे ने यह भी कहा कि, उद्धव ठाकरे अपने घर ''मातोश्री'' से ही बाहर ही नहीं निकलते है तो आम लोगों के मुद्दों पर क्या ध्यान देंगे?

उन्होंने कहा कि, कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण मुंबई (mumbai) में ही करीब 5,000 लोगों की मौत हो गई और पूरे राज्य में 8,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल होने के कारण डॉक्टरों और नर्सों को वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योग धराशायी हैं लेकिन मुख्यमंत्री को कोई मतलब नहीं है। 

आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में सरकार में मतभेद होने की चर्चा आम हो चली है। बताया जा रहा है कि 3 पार्टियों के सहयोग से बनी महाविकास आघाड़ी (MVA government) की सरकार में सब कुछ ठीक नहों चल रहा है। पहले कांग्रेस (Congress) ने सीधे-सीधे उद्धव पर ही पक्षपात करने के आरोप लगाए थे, फिर एक दिन पहले ही 10 DCP के जारी किए गए ट्रांसफर आर्डर को रद्द कर दिया गया फिर सोमवार को खुद एनसीपी चीफ शरद पवार (sharad pawar) गृह मंत्री अनिल देशमुख (anil deshmukh) को लेकर उद्धव से मिलने उनके घर मातोश्री पहुंचे। सरकार की तरह से कोई कुछ नहीं बोल रहा है।

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