Maharashtra assembly election 2019: बीजेपी और शिवसेना के बीच सीट बंटवारा, बीजेपी के लिए 'बाहरी' बन सकते हैं गले की फांस

दोनों दलों के बीच 50-50 फॉर्म्युले की चर्चा थी, लेकिन बीजेपी के कई नेता इस फॉर्मूले से नाराज थे। कई नेताओं ने तो चुनाव में 135 से ज्यादा सीटों की मांग दी थी, जिसके बाद शिवसेना को कहना पड़ा कि अंतिम निर्णय उद्धव ठाकरे, मुख्यमंत्री और अमित शाह ही लेंगे।

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विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच सीट बंटवारे मुद्दे पर बात हुई, लेकिन इनके बीच कोई सहमती नहीं बन सकी।बताया जाता है कि अब 7 सितंबर को मोदी के महाराष्ट्र के दौरे के बाद ही कुछ बात आगे बढ़ सकती है। सूत्रों के अनुसार दोनों पार्टियों के बीच हुई बैठक में बीजेपी ने खुद के लिए 160 सीटें मांगी जबकि शिवसेना को शिवसेना के लिए 110 सीटों का प्रस्ताव रखा है। और अन्य छोटी सहयोगी पार्टियों को 18 सीटों का प्रस्ताव दिया है। बीजेपी के इस नए फॉर्म्युले से शिवसेना  नाराज बताई जाती  है। हालांकि अभी अंतिम फैसले पर मुहर लगनी बाकी है।

बैठक में नहीं बनी सहमती
महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के आवास पर यह बैठक हुई थी, जिसमें बीजेपी की तरफ से वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार उपस्थित थे जबकि शिवसेना की तरफ से सुभाष देसाई शामिल हुए थे। इस बैठक में बेजीपी में शामिल हुए दूसरी पार्टियों के बड़े नेता और वर्तमान विधयाकों के बारे में जब बीजेपी से पूछा गया तो बीजेपी ने कहा कि, पार्टी उन सीटों पर विचार करेगी जहां मौजूदा विधायक पार्टी में शामिल हुए हैं।’ 

पढ़ें: बीजेपी-शिवसेना सीट बंटवारा: उद्धव ठाकरे ने कही बड़ी बात

इसके पहले दोनों दलों के बीच 50-50 फॉर्म्युले की चर्चा थी, लेकिन बीजेपी के कई नेता इस फॉर्मूले से नाराज थे। कई नेताओं ने तो चुनाव में 135 से ज्यादा सीटों की मांग दी थी, जिसके बाद शिवसेना को कहना पड़ा कि अंतिम निर्णय उद्धव ठाकरे, मुख्यमंत्री और अमित शाह ही लेंगे।

बाहरी बनेंगे गले की फांस? 
अब लगता है कि बीजेपी के ही कई नेता अपने 135 सीट के दावे को खारिज करते नजर आ रहे हैं। कई लोगों का यह मानना है कि पिछले कुछ समय से जिस तरह से बीजेपी में कई वर्नतमान विधायक और बड़े नेता शामिल हुए हैं इससे टिकट के दावेदारों की संख्या काफी बढ़ गयी है तो ऐसे में  बीजेपी के लिए 135 सीटों के कोटे पर टिके रहना मुश्किल हो रहा है। इसीलिए सभी दावेदारों को संतुष्ट करने के लिए बीजेपी को कम से कम 150 सीटों की जरूरत होगी।

लेकिन क्या शिवसेना बीजेपी की इस मज़बूरी को समझ कर समझौता करेगी, नहीं? तो ऐसे में बीजेपी बाहरी लोगों को टिकट देकर उनके साथ न्याय करेगी या फिर अपने ही लोगों की बलि देगी?

सीट बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद अभी ही खत्म नहीं हुए हैं। इन्ही कारणों की वजह से प्रधानमंत्री का महाराष्ट्र दौरा अहम माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस दौरे में शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की मोदी से मुलाक़ात हो सकती है और इस बैठक में ही गठबंधन पर अंतिम मुहर लग सकती है।

सहयोगी भी आ रहे आड़े
इस सबके बीच आरपीआई के अध्यक्ष और बीजेपी के सहयोगी रामदास आठवले ने भी 10 सीट का राग अलापा है। उनका कहना है कि बीजेपी की सहयोगी छोटी पार्टियों ने उनकी पार्टी सबसे अधिक मजबूत है इसीलिए उन्हें 10 सीट मिलना चाहिए जबकि दूसरी तरफ बीजेपी के नेता इस बार गठबंधन में शामिल छोटी पार्टियों को भी बीजेपी उनके चुनाव चिन्ह कमल पर चुनाव लड़ने के लिए राज़ी कर रही है। खबर है कि रामदास आठवले, महादेव जानकर, सदाभाउ खोत जैसे नेता अपनी पार्टी को बीजेपी में विलीन कर सकते हैं।

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