मराठा आरक्षण पर सरकार ने निकाली रिक्तियां, कोर्ट हुई खफा


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मराठा आरक्षण मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद सरकार की तरफ से नई सामाजिक एवं शैक्षिणक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के तहत नौकरी के लिए आवेदन विज्ञापन जारी करने को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है, जबकि सरकार की तरफ से कहा गया है कि केवल आवेदन मंगाए गए हैं और नौकरी के लिए अंतिम परीक्षा जुलाई 2019 में होगी। पद भरने की पूरी प्रक्रिया में छह महीने से अधिक समय लगेगा। आपको बता दें कि सरकार नेमराठाओं को आरक्षण इसी सामाजिक एवं शैक्षिणक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के तहत दी है।

'सरकार ऐसी स्थितियों से बचें'  
इस सुनवाई में मराठा आरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिका के वकील गुणरत्ने  सदावर्ते ने अदालत को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग द्वारा नौकरियों के लिए आवेदन मंगाने के लिए जारी विज्ञापन दिखाया। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब मराठा आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं अदालत में विचाराधीन है तो इस तरह के आवेदनों की जरुरत सरकार को क्यों पड़ी। कोर्ट ने आगे कहा कि इस तरह की 'गैरजरूरी स्थितियों' से सरकार को बचना चाहिए क्योंकि याचिकाओं के फैसले आने में थोड़ा समय लगता है। 

आरक्षण का दायरा तय सीमा से अधिक 
आपको बता दें कि कोर्ट में दायर कुछ याचिकाओं में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले को चुनौती दी गई है। एडवोकेट जयश्री पाटील ने मराठा आरक्षण को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया है। जयश्री का कहना है कि मराठा आरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा 16 फीसदी आरक्षण को मंजूरी देने के बाद राज्य में आरक्षण बढ़ कर 52 फीसदी हो गया है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी की सीमा तय की है। गौरतलब है कि  इसके पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने आरक्षण पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया था।

रिक्तियां नहीं होंगी कैंसिल?
याचिका में इस नौकरी को रद्द करने की भी मांग की गयी है लेकिन इस मांग को कोर्ट ने नहीं माना। कोर्ट के मुताबिक नौकरी के आवेदन मंगवाना या कैंसिल करना सरकार को करना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की। 

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