राज्य पर 4.71 लाख करोड़ का कर्ज

राज्य का ऋण तो बढ़ा ही है लेकिन इन पांच सालों में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद भी बढ़ा है।

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जहां एक तरफ फडणवीस सरकार मेक इंडिया के तहत विकास के रास्ते खोलने का दावा कर रही तो वहीँ दूसरी तरफ राज्य पर कर्ज का पहाड़ बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2014 में बीजेपी सरकार ने जब सत्‍ता संभाली थी, उस समय राज्‍य पर कुल 1.8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जो वर्ष 2019 में (जून तक) बढ़कर 4.71 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा महाराष्‍ट्र सरकार ने करीब 43 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं को बैंक गारंटी दी है। हालांकि राज्य का ऋण तो बढ़ा ही है लेकिन इन पांच सालों में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद भी बढ़ा है।

इस बारे में पूर्व वित्‍त सचिव सुबोध कुमार ने कहा, 'विभिन्न परियोजनाओं के लिए जो संस्था और संगठन कर्ज लेते हैं वे कर्ज नहीं लौटाते हैं, इसके लिए राज्‍य सरकार को आगे आना होगा।'

सरकार की तरफ से भी कई योजनाओं के लिए 43 हजार करोड़ रुपए लोन की गारंटी दी गयी है. साल 2016-17 में राज्‍य सरकार ने 7305 करोड़ के लोन को अपनी गारंटी दी थी। वर्ष 2017-18 में गारंटी बढ़कर 26657 करोड़ रुपये पहुंच गई। MMRDA द्वारा मुंबई ट्रांस-हार्बर लिंक प्रॉजेक्‍ट और मेट्रो-4 परियोजनाओं के लिए 19016 करोड़ रुपये के लोन को गारंटी देने से बढ़ा। इसके अलावा राज्‍य सरकार ने इसी साल अगस्‍त में नागपुर एक्‍सप्रेसवे के लिए भी 4 हजार करोड़ रुपये के लोन को अपनी गारंटी दी है।

वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि राज्य सरकार ने केवल चयनित योजनाओं की गारंटी दी है। राज्य को यह गारंटी केवल सार्वजनिक कंपनियों को प्रदान करने की आवश्यकता है।

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