आरे मामले के पहले भी शिवसेना और बीजेपी में कई मुद्दो पर दिखी है दुरियां


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आरे मुद्दे को लेकर एक बार फिर से शिवसेना और बीजेपी आमने सामने खड़े दिख रहे है, जहां एक ओर राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस बीएमसी के ट्री ऑथिरिटी के पेड़ काटने के आदेश का समर्थन करते दिख रहे है तो वही दूसरी ओर युवासेना के प्रमुख और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे आरे के पेड़ काटने के फैसले पर अपनी नाराजगी दिखा रहे है।  आदित्य ठाकरे ने बीएमसी के ट्री ऑथोरीटी के पेड़ काटने के फैसले को गलत ठहराया है। आरे के मुद्दे पर एक बार फिर से बीजेपी और शिवसेना आमने सामने आ गए है। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है की बीजेपी और शिवसेना किसी मुद्दे पर अलग अलग दिख रहे हो। 

इसके पहले भी कई ऐसे मुद्दे आए है जहां पर बीजेपी और शिवसेना में आपसी मतभेद खुलकर सामने आए है।  ऐसे कई मुद्दे है जहां पर बीजेपी और शिवसेना आमने सामने खड़े दिख रहे है चाहे वह उत्तर भारतीय के मुद्दे पर हो या फिर राम मंदिर के मुद्दे पर , शिवसेना और बीजेपी को जब जब मौका मिला है तब तब दोनों ही पार्टियों ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।  

आईये नजर डालते है ऐसे ही कुछ मुद्दो पर जहां पर शिवसेना और बीजेपी में मतभेद सामने आए है

मुख्यमंत्री की गद्दी- राज्य में होनेवाले विधानसभा चुनाव के समय हर राजनीतिक पार्टियों में कुछ ना कुछ मतभेद सामने आ जाते है।  इस बार के चुनाव में बीजेपी और शिवसेना के बीच जिस बात को लेकर सबसे बड़ी खिंचातनी दिख रही है वह है राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी। जहां एक ओर शिवसेना आदित्य ठाकरे को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखाना चाहती है तो वही दूसरी ओर बीजेपी देवेंद्र फड़मवीस को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने कई बार इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आए है।  

राम मंदिर- भले ही राम मंदिर पर बीजेपी और शिवसेना की विचारधारा एक हो लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले शिवसेना ने राम मंदिर का ही मुद्दा लेकर बीजेपी पर निशाना साधा था।  लोकसभा चुनाव के पहले शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आयोध्या का दौरा किया था और नारा दिया था की' पहले मंदिर, फिर सरकार'। लोकसभा चुनाव के पहले उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राम मंदिर निर्माण को लेकर निशाना साधा था।  

पर्युषण के मौके पर मांसाहारी दुकाने बंद रखना- बीजेपी के कई नेताओं ने जैन पर्व पर्युषण के दौरान जैन समुदाय के इलाको में मांसाहारी दुकाने बंद रखने की मांग सरकार से की है ,हालांकी शिवसेना के कई नेताओं ने इसका विरोध किया था।  शिवसेना के साथ साथ मनसे के भी नेताओ ने बीजेपी के इन नेताओं की मांग का विरोध किया है।

नोटबंदी, जीएसटी- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार द्वारा लागू किये गए नोटबंदी और जीएसटी पर भी शिवसेना ने की बार निशाना साधा। नोटबंदी को लेकर शिवसेना ने कई बार सामना में केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। लोेकसभा चुनाव के पहले शिवसेना ने कई मौको पर सरकार के नोटबंदी और जीएसटी को सही तरह से लागू ना करने पर निशाना साधा था। 

बीएमसी में मेयर की सीट को लेकर भी मतभेद- साल 2017 में बीएमसी में हुए चुनाव के बाद भी शिवसेना और बीजेपी में मतभेद एक बार फिर से खुलकर सामने आया। 2017 के बीएमसी चुनाव में शिवसेना को 84 सीटें तो वही बीजेपी को 82 सीटें आई थी।  इतनी सीटें के आने के बाद बीजेपी ने मेयर पद के लिए भी अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन शिवसेना के कड़े रुख के बाद बीजेपी ने अपने पैर पीछे खिंच लिए और शिवसेना को बीएमसी में मेयर पद दे दिया।  

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