कौन बनेगा मुख्यमंत्री: इन फॉर्मूलों पर हो सकती है चर्चा

​दोनों पार्टियों की तरफ से सरकार बनाने को लेकर कुछ भी फॉर्मूला सुझाया नहीं गया है लेकिन फिर भी राजनीतिक विशेषज्ञ और तमाम समाचार चैनल अपने अपने तरिके से फॉर्मूला बना रहे हैं। इसी में एक है साल 1995 में बना फॉर्मूला।

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महाराष्ट्र और हरियाणा इन दो राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें से हरियाणा स्थिति साफ़ हो गयी लेकिन महाराष्ट्र में अभी भी राजनीतिक बादल छाए हुए हैं जिससे स्थिति साफ़ नहीं हो पा रही है। महाराष्ट्र बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को इतनी सीटें मिली है कि वे आसानी से सरकार बना सकते हैं लेकिन दोनों पार्टियों में सीएम पद को लेकर गतिरोध चल रहा है। जहां एक तरफ महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि, हमारी पार्टी के अध्‍यक्ष के मुताबिक, शिवसेना को सीएम पद देने के मसले पर कुछ भी तय नहीं किया गया है। ना तो राज्‍य में सरकार गठन को लेकर अभी तक कोई फॉर्मूला तय हुआ है।' तो वहीं दूसरी तरफ शिवसेना के 50-50 फॉर्मूले को लेकर खूंटा गाड़े बैठी है, इससे काम उसे कुछ भी स्वीकार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक दोनों पार्टियां 1995 वाला इतिहास दोहरा सकती हैं।

क्या हो सकता है फॉर्मूला?
दोनों पार्टियों की तरफ से सरकार बनाने को लेकर कुछ भी फॉर्मूला सुझाया नहीं गया है लेकिन फिर भी राजनीतिक विशेषज्ञ और तमाम समाचार चैनल अपने अपने तरिके से फॉर्मूला बना रहे हैं। इसी में एक है साल 1995 में बना फॉर्मूला। साल 1995 में शिवसेना बड़ा भाई के रोल में थी उसकी अधिक सीट आये थे. इसीलिए शिवसेना की तरफ से मनोहर जोशी को सीएम बनाया गया।

इस फॉर्मूले को देखते हुए इस बार भी यही नियम लगाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो फिर बीजेपी कोटे से ही मुख्यमंत्री बनेगा। इसके बाद अन्य फॉर्मूले भी हैं, जैसे- 

1) बड़ी पार्टी होने के कारण बीजेपी का सीएम और शिव सेना का डिप्टी सीएम,

2) बीजेपी का सीएम और शिव सेना का डिप्टी सीएम और विभागों का समान बंटवारा,  

3) बीजेपी का सीएम और शिवसेना का डिप्टी सीएम और शिव सेना के पास बड़े और मलाईदार विभाग जैसे गृह विभाग, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग जैसे शिव सेना के पास, 

बताया जा रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को मुंबई आ सकते हैं, इसके बाद ही दोनों दलों की आपस में बातचीत होगी। 

मुख्यमंत्री किसका होगा?
बीजेपी शुरू से ही शिवसेना के 50-50 फॉर्मूले को मानने से इनकार कर रही है, तो  दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे दावा कर चुके हैं कि महाराष्‍ट्र में सरकार देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में ही बनेगी। जबकि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे धमकी भरे लहजे में कह चुके हैं कि यदि ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पर भाजपा सहमत नहीं बनी तो उनके पास दूसरे विकल्प भी हैं।

शिवसेना के दूसरे नेता भी भाजपा पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद NDA की सरकार बनने की राह आसान नहीं दिखाई दे रही है।


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