महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू, पहले भी 2 बार लग चुका है राष्ट्रपति शासन

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति से राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की थी क्योंकि उन्होंने अपनी सिफारिश में कहा था राज्य में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।

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महाराष्ट्र में पिछले 18 दिनों से मचे राजनीतिक गतिरोध के बाद मगंलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य में राज्यपाल शासन को मंजूरी दे दी यानी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। इसके पहले राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति से राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की थी क्योंकि उन्होंने अपनी सिफारिश में कहा था राज्य में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। इसके पहले इस प्रस्ताव को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में पहले ही मंजूरी दे दी गई थी। 

राज्य में लगा राष्ट्रपति शासन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गृह मंत्रालय ने बताया कि गवर्नर ने जो सिफारिश भेजी है उसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र में   संविधान के मुताबिक सरकार गठन करने का कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा है। तो ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन को लागू किया जाना चाहिए। गृह मंत्रालय ने आगे बताया कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन होने तक  विधानसभा निलंबित रहेगी। 

आपको बता दें कि राज्य में 24 अक्टूबर को नतीजे आए थे। बीजेपी 105 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। शिवसेना को 56 सीटें जबकि एनसीपी को 54 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन साथ चुनाव लड़ने के बाद भी बेजीपी और शिव सेना मुख्यमंत्री के पद को लेकर आप में उलझे रहे, इसके बाद शिव सेना ने एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन की मांग की, लेकिन न तो बीजेपी और न ही शिव सेना दोनों ही राज्यपाल के सामने बहुमत सिद्ध कर पाए।

तीसरी बार लगा राष्ट्रपति शासन

महाराष्ट्र में यह तीसरी बार है कि राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। इसके पहले भी दो बार राष्ट्रपति शासन लागू किया जा चुका है। इसके पहले पहली बार 17 फरवरी 1980 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। उस समय शरद पवार मुख्यमंत्री थे।यह राष्ट्रपति शासन कुल 112 दिन तक यानी 17 फरवरी 1980 से लेकर 8 जून 1980 तक राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।

जबकि दूसरी बार 32 दिन तक राष्ट्रपति शासन लगाया गया था यानी 28 सितंबर 2014 से लेकर 30 अक्टूबर 2014 तक राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। उस समय कांग्रेस और एनसीपी की सरकार थी और मुख्यमंत्री कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चव्हाण थे, लेकिन कांग्रेस और एनसीपी में मतभेद पैदा हो जाने के कारण एनसीपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया जिससे सरकार अल्पमत में आ गयी और चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा।

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