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स्टाम्प ड्यूटी के बाबत राज्य सरकार ने लिया बड़ा फैसला, आम लोगों को होगा फायदा

बताया जाता है कि, उद्धव सरकार के इस निर्णय से आम जनता को काफी राहत मिलेगी और शुल्क चोरी पर भी अंकुश लगेगा।

स्टाम्प ड्यूटी के बाबत राज्य सरकार ने लिया बड़ा फैसला, आम लोगों को होगा फायदा
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स्टांप ड्यूटी कम करने और संपत्ति खरीद में रजिस्ट्री के दौरान लगने वाले स्टाम्प ड्यूटी शुल्क में कमी लाने और उसमें एकरूपता लाने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार की तरफ से एक निर्णय लिया गया है। इस बाबत उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें सभी कैबिनेट मंत्री उपस्थित थे।बताया जाता है कि, उद्धव सरकार के इस निर्णय से आम जनता को काफी राहत मिलेगी और शुल्क चोरी पर भी अंकुश लगेगा।

इस बाबत जो निर्णय लिया गया उसके अनुसार, सामान्य नागरिक, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग, किसानों के साथ-साथ अन्य असंगठित घटक जिनके पास रजिस्ट्री नहीं हैं, लेकिन उनके पास सात-बारह या मिल्कियत प्रमाण पत्र हैं तो ऐसे लोगों को अपने पास मौजूद संपत्ति के टाइटल और साक्ष्य के आधार पर ऋण के लिए पंजीकरण करने के समझौते पर कम स्टाम्प शुल्क का भुगतान करना होगा।

बैंकों से संबंधित दस्तावेजों पर स्टांप शुल्क में विसंगति के कारण स्टांप शुल्क का भुगतान नहीं हो पाता।  इस पर अंकुश लगाने के लिए, टाइटल डीड या इक्विटेबल मॉरगेज या हायपोथिकेशन संबंधित जमा पर लगाए गए स्टांप शुल्क की दर 0.2 प्रतिशत के बजाय 0.3 प्रतिशत किया गया है। नतीजतन, मंत्रिमंडल ने बैंक से संबंधित दस्तावेजों पर एक समान स्टांप शुल्क लगाने का फैसला किया है, साथ ही दस्तावेजों के ऑनलाइन पंजीकरण या नोटिस के ऑनलाइन दाखिल करने के लिए 15,000 रुपये शुल्क फीस के रूप में लेने का भी निर्णय मंत्रिमंडल की तरफ से किया गया है।

इसके अलावा, दस्तावेज़ में विभिन्न प्रकार के अन्य बातों का भी उल्लेख है।  ऐसे दस्तावेजों पर स्टांप शुल्क भी लगाया जाता है।  तदनुसार, मंत्रिमंडल ने बैंकों के एक समूह द्वारा बंधक ऋण पर स्टांप शुल्क लगाने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, उस खंड में विभिन्न खंडों या विभिन्न हस्तांतरणों और लेनदेन में संशोधन करने का भी निर्णय लिया।

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