मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार, 1 जुलाई को कहा, "चुनाव नजदीक आते ही उद्धव ठाकरे को अचानक मराठी लोगों की याद आ गई है।" उन्होंने आरोप लगाया, "अब मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की योजना पर फिर से चर्चा होगी। मुंबई कभी सोने के अंडे देने वाली मुर्गी की तरह थी, लेकिन उन्होंने इसे नुकसान पहुँचाना चुना। भाजपा सरकार ने मुंबई को बदल दिया है, लेकिन उनके कार्यों का उद्देश्य मराठी समुदाय को बाहर निकालना है।" (Marathi people are being expelled from Mumbai because of Uddhav Thackeray said Devendra Fadnavis)
मंगलवार को वर्ली के राष्ट्रीय खेल परिसर में भाजपा का राज्य सम्मेलन हुआ। इस दौरान फडणवीस ने ठाकरे की कड़ी आलोचना की। फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने मराठी के नाम पर केवल राजनीति की है। हमारी सरकार ने बीडीडी चालों में रहने वालों और धारावी में गरीबों को घर देने का फैसला किया। संविधान में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द का अर्थ धर्मनिरपेक्ष नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस अवसर पर जोर दिया कि हिंदुत्व का अर्थ राष्ट्रवाद है।
‘हमें हर भाषा पर गर्व है’
महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्य है और तीसरी भाषा वैकल्पिक है। मराठी को स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन हमें हिंदी और देश की हर भाषा पर गर्व है।हम किसी को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे जो अंग्रेजी को तरजीह देता है और भारतीय भाषाओं का विरोध करता है।
फडणवीस ने कहा की "ठाकरे ने हिंदी को अनिवार्य बनाया और हमने तीसरी भाषा को वैकल्पिक रखा, फिर भी सत्ता से बाहर होने के बाद ठाकरे ने हमेशा की तरह ढुलमुल रवैया अपनाते हुए दोधारी नीति अपनाई है, लेकिन किसी के दबाव में आए बिना राज्य के छात्रों के हित में फैसला लिया जाएगा"
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