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महंगाई और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में कांग्रेस ने भारत बंद का ऐलान किया था, इस बंदी में कांग्रेस का साथ 22 पार्टियों ने दिया था जिसमें एमएनएस भी शामिल थी। लेकिन इस बंदी में जितनी आक्रामक एमएनएस दिखी उतनी कांग्रेस नहीं, आंदोलन को देखते हुए ऐसा लग रह था कि आंदोलन की एलान एमएनएस ने किया है कांग्रेस ने नहीं।

एमएनएस स्टाइल में 'आंदोलन'
एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने विरार से लेकर बोरीवली और दक्षिण मुंबई तक बड़े ही आक्रामक ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जबरन दुकान बंद करवाना, तोड़ फोड़ करना, फेरीवालों, टैक्सी और ऑटो वालों मारपीट करना, पटरी पर जमा होकर ट्रेन रुकवाना जैसे कई गतिविधियों को अंजाम देकर एमएनएस ने आंदोलन के दौरान जमकर हिंसा की।

दादर में एमएनएस कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी की शवयात्रा निकाली जिसे पुलिस ने सफल होने नहीं दिया, इसके बाद वातावरण काफी गरमा गया था, जिसे बाद में पुलिस ने कंट्रोल में किया। प्रभादेवी इलाके में एमएनएस कार्यकर्ताओं ने सीएम फडणवीस को काला झंडा दिखाया तो अंधेरी के डीएन नगर मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो को भी रोकने की कोशिश की। यही नहीं मुंबई के कई इलाके में एमएनएस ने जबरन दुकानें बंद करवाईं।

जिस तरह ने एमएनएस ने आंदोलन को अपने स्टाइल में किया उससे तो यही लगता है कि एमएनएस ने इस आंदोलन का पूरा श्रेय लूट लिया, जबकि कांग्रेस हाथ ही मलती रह गयी रह गयी।

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