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मनसे ने बांग्लादेशियों के खिलाफ लगाए पोस्टर, कहा - भागो, वर्ना मनसे स्टाइल में भगाएंगे

अभी हाल ही में मनसे की तरफ से महाधिवेशन आयोजित किया गया था, जिसमें पार्टी प्रमुख राज ठाकरे ने कहा था कि देश में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों को बाहर निकाल देना चाहिए।

मनसे ने बांग्लादेशियों के खिलाफ लगाए पोस्टर, कहा - भागो, वर्ना मनसे स्टाइल में भगाएंगे
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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे (MNS) ने नवी मुंबई के पनवेल इलाके में बांग्लादेशी नागरिकों के लोगों के खिलाफ पोस्टर लगाए हैं। पोस्टर में कहा गया है कि बांग्लादेशी देश छोड़ कर चले जाएं वर्ना मनसे स्टाइल में उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा। आपको बता दें कि अभी हाल ही में मनसे की तरफ से महाधिवेशन आयोजित किया गया था, जिसमें पार्टी प्रमुख राज ठाकरे ने कहा था कि देश में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों को बाहर निकाल देना चाहिए।

मनसे के नेता बाला नांदगांवकर ने कहा कि राज ठाकरे का कहना है कि देश की जनसंख्या पहले ही 135 करोड़ है, अब और कितने लोगों को नागरिकता देंगे?   

मनसे का यह पोस्टर इस समय आना उनकी पार्टी की रणनीति भी हो सकती है, क्योंकि भारत में रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ 9 फरवरी को विरोध प्रदर्शन करने वाली है।

यही नहीं इस अधिवेशन में मनसे की तरफ से पार्टी के नए भगवा झंडे को भी लॉन्च किया गया था और राज ठाकरे ने अपने भाषण में मुख्य रूप से हिंदुत्व को लेकर ही भाषण दिया था।

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इस समय देश में जहां एक तरफ कई राजनीतिक दल CAA और NRC के विरोध में हैं तो वहीँ दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में CAA और NRC को लेकर आम लोग खासकर मुस्लिम लोग सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कई राज्य के मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की है कि वे अपने यहां CAA और NRC को लागू नहीं होंगे देंगे। कई राज्य सरकारों ने तो नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव भी लागू कर दिया है।

पिछले कुछ समय से जिस  तरह से महाराष्ट्र की राजनीति में कई नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले हैं। शिव सेना ने अपने विरोधी पार्टियों कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिल कर सरकार का गठन किया, साथ ही अब कहा जा रहा है कि शिव सेना सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर है, जबकि शिव सेना खुद इससे इनकार करती रही है।

 गौरतलब है कि पिछले कुछ चुनावों से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है, इसके बाद खुद मनसे को किसी खास मौके की तलाश थी, और उसे यह मौका मिला अधिवेशन के रूप में। अधिवेशन में मनसे ने भी मौका देखते हुए राजनीति की जमीन पर हिंदुत्व के बीज बोने में जरा भी देर नहीं लगाईं। यही नहीं अधिवेशन के कुछ दिन पहले भी राज ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच मुलाकात हुई थी, जिससे कयास लग रहे थे कि बीजेपी ने शिव सेना की काट के रूप में मनसे को साथ ला सकती है।

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