अब ओबीसी आरक्षण को रद्द करने की उठी मांग

मुंबई लाइव से बाते करते हुए सराटे ने कहा कि ओबीसी समाज को आरक्षण देते समय किसी भी प्रकार का न तो कोई सर्वे किया गया और न ही कोई अध्ययन।

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महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के बाद अब ओबीसी आरक्षण पर भी सवाल उठने लगे हैं। ओबीसी आरक्षण को रद्द करने की मांग को लेकर बुधवार को एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गयी। याचिका में इस आरक्षण को गलत बताते हुए कहा गया है कि ओबीसी आरक्षण एक जातिगत आरक्षण है,इसे 34 फीसदी को 32 फीसदी आरक्षण दिया गया है। आपको बता दें कि सराटे आरक्षण विशेषज्ञ माने जाते हैं इन्होने आरक्षण के मुद्दे पर कई अध्ययन किया है।  

क्या है याचिका में?
इस याचिका को डॉ. बालासाहेब सराटे ने दायर किया है। मुंबई लाइव से बाते करते हुए सराटे ने कहा कि ओबीसी समाज को आरक्षण देते समय किसी भी प्रकार का न तो कोई सर्वे किया गया और न ही कोई अध्ययन। 34 फीसदी ओबीसी को 32 प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया जो कि काफी अधिक है, इसीलिए इस आरक्षण को रद्द होना चाहिए।

विरोध हुआ शुरू
अब सराटे का विरोध भी होना शुरू हो गया है। मराठा क्रांति मोर्चा का कहना है कि सराटे मराठा आरक्षण के विरोध में काम करते हैं, जबकि ओबीसी नेता प्रकाश अन्ना शेंडगे ने सराटे को संघ का कार्यकर्ता बताया।

मुंबई लाइव से बाते करते हुए शेंडगे ने कहा कि ओबीसी को जो आरक्षण दिया गया है वह घटनात्मक है, इनके सभी आरोपों का जवाब ओबीसी परिषद् के द्वारा दिया जाएगा। इसके लिए गुरूवार को ओबीसी नेताओं की बैठक बुलाई गई है। 

पढ़ें: मराठा आरक्षण: 23 जनवरी तक कोई नियुक्ति नहीं

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