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यूपी, बिहार अपने यहां रोजगार पैदा करे, मुंबई में बढ़ रही है भीड़: शिवसेना

नितिन गडकरी (Nitin gadkari) ने पिछले महीने कहा था कि मुंबई में भीड़भाड़ को कम करने की आवश्यकता है क्योंकि घनी आबादी वाले शहर को घातक परिणाम का सामना करना पड़ता है।

यूपी, बिहार अपने यहां रोजगार पैदा करे, मुंबई में बढ़ रही है भीड़: शिवसेना
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शिवसेना (Shiv sena) ने अपने मुखपत्र सामना (saamana) के संपादकीय में लिखा है कि मुंबई में भीड़ बढ़ती ही जा रही है। यूपी-बिहार को अपने यहां रोजगार पैदा करना होगा। अगर वहां रोजगार होता तो लोग भागकर फिर से मुंबई नहीं आते। आपको बता दें कि इसके पहले मुंबई में भीड़भाड़ को कम करने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin gadkari) ने पिछले महीने कहा था कि मुंबई में भीड़भाड़ को कम करने की आवश्यकता है क्योंकि घनी आबादी वाले शहर को घातक परिणाम का सामना करना पड़ता है।

'सामना' में लिखा गया है कि, अगर उत्तर प्रदेश और बिहार में पुणे और मुंबई जैसे स्मार्ट शहर बनाए जाते तो देश की आर्थिक राजधानी का जनसंख्या घनत्व अपने आप कम हो जाता। कोरोना संकट के बावजूद श्रमिक मुंबई और पुणे लौट रहे हैं इसकी वजह है भूख। यही कारण है कि मुंबई में फिर से आबादी बढ़ रही है।

संपादकीय में कहा गया है कि, लॉकडाउन के दौरान अपने गृह राज्यों में गए लगभग 1.50 लाख प्रवासी कामगार महाराष्ट्र लौट आए हैं। उनके पास वहां कोई काम नही है, जबकि कल तक यूपी और बिहार के मुख्यमंत्री कह रहे थे कि श्रमिकों को वापस बुलाने के लिए अनुमति लेनी होगी, और जो प्रवासी मजदूर लौट आए हैं उन्हें उनके ही राज्य में काम दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और प्रवासी अब मुंबई और पुणे लौट रहे हैं।

आगे लिखा गया है कि, मुंबई देश के खजाने में एक महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन Covid-19 के खिलाफ लड़ाई में "केंद्र से उचित वित्तीय सहायता" नहीं मिली है।

संपादकीय में दावा किया गया है कि, बंद के दौरान लगभग सात से आठ लाख प्रवासी श्रमिक मुंबई से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा चले गए थे, लेकिन अब वे वापस आ रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस के जोखिम की तुलना में भूख का जोखिम अधिक है। लोग नौकरियों की तलाश में जोखिम लेने और यात्रा करने को तैयार हैं।

शिवसेना ने यूपी और बिहार में कोई विकास कार्य नहीं होने का दावा भी किया।

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