राणे का 'संघर्ष यात्रा' सफल होगा या असफल ?


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कांग्रेस नेता नारायण राणे ने अपने पार्टी के नेताओं और अन्य विपक्षी नेताओं को 'संघर्ष यात्रा' के मुद्दे पर निशाना बनाया है। उन्होंने 'संघर्ष यात्रा' को असफल करार देते हुए कहा कि अगर यह 'संघर्ष यात्रा' विधानसभा सत्र के ठीक बाद आयोजित किया गया होता तो यह यात्रा सफल रहती ।


राणे ने जोर देकर कहा कि उन्हें संघर्ष यात्रा के बारे में कोई जिम्मेदारी सौंपी नहीं गई थी। उन्होंने दोहराया कि भाजपा नेताओं ने उन्हें पार्टी में शामिल होने की पेशकश की है लेकिन उस पार्टी में शामिल होने में अभी कोई सच्चाई नहीं है।राणे ने सभी कयासों को झुठलाते हुए कहा कि मेरे बारे में भाजपा में शामिल होने की खबर मीडिया ने फैलाई है, मैंने भाजपा में शामिल होने के बारे में कभी टिप्पणी नहीं की। राणे ने आगे कहा कि इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव अहमद पटेल से लगभग सवा घंटे तक मुलाकात की थी।

राणे ने शिवसेना पर भी हमला किया और भविष्यवाणी की कि 2019 के चुनावों में पार्टी के हाथ से झंडा निकल जाएगा हाथ में सिर्फ डंडा रह जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर मैं भाजपा में शामिल होता हूँ तो शिवसेना राज्य सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेगी? राणे ने कटाक्ष किया कि शिवसेना के 17 विधायक सरकार में ही रहेंगे भले ही वह पार्टी राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लें।


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