'संस्कारी बनो और मुंबई को डूबने से बचाओ'- उद्धव ठाकरे


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'मुंबई की भौगोलिक संरचना ही ऐसी है कि वह भारी बारिश में डूब जाती है और लोग पूछते हैं कि बीएमसी क्या कर रही है? लेकिन मुंबईकरों की भी कुछ जिम्मेदारी है की नहीं?' बारिश में मुंबई के डूबने की समस्या का समाधान खोजने के बजाय मुंबईकरों को उनका कर्तव्य याद दिलाने वाले यह शब्द हैं खुद शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के, जो मुंबई के डूबने का कारण मुंबई की भौगोलिक स्थिति को बता रहे हैं।

उद्धव ठाकरे अँधेरी की एक संस्था 'आल इंडिया लोकल सेल्फ गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट' के वार्षिक दीक्षांत समारोह में पहुंचे थे और उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने यह बातें कहीं। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष रणजीत चव्हाण, उद्योगमंत्री सुभाष देसाई, महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर, पूर्व बीएमसी कमिश्नर जयराज फाटक सहित कई मान्यवर उपस्थित थे।

ठाकरे ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं शहरों के प्रति लोगों को कर्तव्य, संस्कार सिखाती हैं। लेकिन आज भी कचरा कहां फेंकना है यह लोगों को बताना पड़ता है, इसीलिए हमें संस्कारी होने की जरूरत है और ऐसी ही संस्थाएं लोगों को संस्कारी बनाती हैं। उन्होने हर राज्य में ऐसी संस्थाएं खोले जाने की बात पर बल दिया।

उद्धव का यह कथन बिलकुल सही है कि लोग कचरा इधर उधर फेंक देते हैं जिससे नालों में यही कचरा जमा होकर बाढ़ का कारण बनता है लेकिन अब इस बात से उद्धव कैसे इनकार करेंगे कि नाला सफाई में करोड़ो रूपये हजम कर लेने वाली बीएमसी अगर अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही से करे तो शायद मुंबई को बाढ़ का सामना नहीं करना पड़े।

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