अधिवेशन बाद हो सकता है मंत्रालयों का विस्तार, जयंत पाटील उपमुख्यमंत्री तो अजित पवार बन सकते हैं वित्त मंत्री?

महाराष्ट्र में सरकार का गठन हुए लगभग 15 दिन हो गये हैं, इसके बाद भी कैबिनेट विस्तार और मंत्रालयों का बंटवारा नहीं हुआ है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कई बात सत्ता पक्ष पर सवाल भी उठा चुके हैं।

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राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो रही है कि आने वाले कुछ दिनों में महाराष्ट्र सरकार कैबिनेट विस्तार कर सकती हैइसे लेकर पिछले कुछ दिनों से सत्ता पक्ष की सहयोगी पार्टियों के बीच बैठकों का दौर चल रहा है सूत्रों के अनुसार एनसीपी के जयंत पाटील को उपमुख्यमंत्री और अजित पवार को वित्त मंत्री बनाया जा सकता है। साथ ही इन पार्टियों में विभागों का बंटवारा होने की भी बात सामने आ रही है

महाराष्ट्र में सरकार का गठन हुए लगभग 15 दिन हो गये हैं, इसके बाद भी कैबिनेट विस्तार और मंत्रालयों का बंटवारा नहीं हुआ है इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कई बात सत्ता पक्ष पर सवाल भी उठा चुके हैं


अभी हाल ही में देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा था कि, शीतकालीन अधिवेशन निकट आ रहा है, लेकिन महाविकास आघाड़ी सरकार ने अभी तक मंत्रालयों का विस्तार नहीं कर पाई है। अधिवेशन के दौरान अगर हमें सवाल पूछना होगा तो हम किससे पूछेंगे?  

मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच कुछ दिनों से बैठकों का दौर चल रहा है, कयास लगाये जा रहे हैं कि इनके बीच मंत्रालय के बंटवारे को लेकर आपसी सहमती नहीं बन पा रही है वित्त, आवास, राजस्व, शहरी विकास जैसे मलाईदार मंत्रालय के तीनों पार्टियों जोर मार रही हैं लेकिन कौन सा विभाग किसे मिलेगा यह अभी तक नहीं हो पा रहा है इसीलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा छह मंत्रियों को नियुक्त करने के बाद भी अभी तक विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है

सरकार से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि, विभागों का बंटवारा सही समय पर और जल्द से जल्द हो इसीलिये मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी चीफ शरद पवार और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट के बीच बैठक हुई इस बैठक में इस मुद्दे पर अंतिम चर्चा हुई और एक आम सहमती भी बनी और जल्द ही विभागों का बंटवारा भी हो जाएगा बताया जा रहा है कि शीतकालीन अधिवेशन के बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार और मंत्रालयों का बंटवारा होगा सत्ता पक्ष में शामिल सहयोगी पार्टियों की राजनीतिक जरूरतों और इच्छा को ध्यान में रखकर मंत्रालयों का बंटवारा तय किया गया है। 


पढ़ें: शीतकालीन सत्र के बाद होगा मंत्रिमंडल का विस्तार?


सूत्र का कहना है कि बैठक के मुताबिक, शिवसेना के पास नगर विकास, उद्योग, कानून, उच्च और तकनीकी शिक्षा, जल संसाधन, राज्य सड़क विकास निगम, परिवहन, सामान्य प्रशासन, सांस्कृतिक मामले और मराठी भाषा जैसे खाते होंगे। एनसीपी के पास गृह, वित्त, आवास, सहयोग, ग्रामीण विकास, चिकित्सा शिक्षा और श्रम विभाग जैसे विभाग होंगे। साथ ही कांग्रेस को राजस्व, सार्वजनिक कार्य, उत्पाद शुल्क, ऊर्जा, स्कूली शिक्षा, महिला और बाल कल्याण विभाग दिया जा सकता है। 

हालांकि जो खबरें सामनें आ रही हैं कि उसके मुताबिक अगर सब कुछ सही रहा तो इस बार महाराष्ट्र की जनता को अलग से उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री दोनों दिखने को मिल सकता है, जबकि फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद ही नहीं था और गृह मंत्री विभाग भी मुख्यमंत्री देख रहे थे


पढ़ें: नई सरकार में होगे दो उपमुख्यमंत्री?

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