Citizen Amendment Bill: कांग्रेस खिलाफ, शिव सेना साथ

कांग्रेस की अगुआई में अधिकांश विपक्षी दलों ने भी नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया तो वहीं शिवसेना ने इसका समर्थन किया।

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महाराष्ट्र में सत्ता के लिए शिव सेना भले ही बीजेपी के साथ अलग हो गयी हो लेकिन नागरिकता संशोधन बिल को जब गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया तो शिव सेना ने बीजेपी के पक्ष में ही वोट किया। सोमवार को नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में काफी हंगामे और शोर शराबों के बीच पास हो गया इस बिल के पक्ष में कुल 293 वोट पड़े जबकि इसके विरोध में 82 वोट पड़े. लोकसभा में इस दौरान कुल 375 सांसदों ने वोट किया था


शिव सेना ने रखी थी यह मांग 

जब इस बिल को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, 'इन तीन देशों से अब तक कितने लोग आए हैं और कितने लोगों की पहचान की गई है। यदि सारे लोगों को नागरिकता दी गई तो देश की आबादी बहुत बढ़ जाएगी। इन लोगों के आने से भारत पर कितना बोझ बढ़ेगा, इसका जवाब भी होम मिनिस्टर को देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा,
पाकिस्तान और बांग्लादेश में भारत विभाजन के चलते लोगों के उत्पीड़न की बात समझ में आती है, लेकिन अफगानिस्तान से इसका विषय है यह बात समझ में नहीं आई। 

राउत के मुताबिक, इस विधेयक में श्रीलंका को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस बिल से अफगानिस्तान को हटाकर श्रीलंका को शामिल किया जाए तो बेहतर होगा।


इसके पहले नागरिकता संशोधन बिल को लेकर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा था कि, 'मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह नागरिकता संशोधन बिल पर अडिग है लेकिन क्या यह बिल वोट बैंक की पॉलिटिक्स के लिए पास किया जा रहा है? हम मानते हैं कि हिंदुओं के पास भारत के अलावा कोई दूसरा देश नहीं है, लेकिन अगर वोट बैंक के लिए नागरिकता बिल को पास करने की कोशिश की जा रही है तो यह देश के लिए ठीक नहीं है' संपादकीय में आगे लिखा गया था कि, 'हमारी मांग है कि जिन बाहरी लोगों को नागरिकता दी जाएगी, उन्हें 25 सालों तक मतदान का अधिकार नहीं दिया जाएगा इस बारे में देश के गृह मंत्री अमित शाह को सोचना चाहिए क्या यह स्वीकार्य है? यही नहीं इस मुद्दे पर बात करने के लिए शिव सेना ने अपने सभी सांसदों की बैठक भी बुलाई थी


कांग्रेस खिलाफ, शिव सेना साथ 

बता दें कि हाल में ही महाराष्ट्र में हुए जिस तरह से सियासी उठापटक हुआ उसके बाद शिवसेना ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया था और वह NDA से अलग हो गई थी इसके बाद शिव सेना ने कांग्रेस और एनसीपी की मदद से सरकार बनाई जहां एक ओर कांग्रेस की अगुआई में अधिकांश विपक्षी दलों ने भी नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया तो वहीं शिवसेना ने इसका समर्थन किया


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