मंत्रिपद की ‘मनोहर’ कथा

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मंत्रिपद की ‘मनोहर’ कथा
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मुंबई - देश के रक्षामंत्री पद से इस्तीफा देकर मनोहर पर्रिकर फिर एक बार गोवा के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हो गए हैं और राजकीय तर्कवितर्क नए सिरे से शुरू हो गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी अगली पारी खेलने वाले हैं ऐसा दावा स्वघोषित राजकीय विश्लेषकों ने करनी शुरू कर दी है। फडणवीस देश के नए रक्षामंत्री होंगे ऐसा सोशल मीडिया पर फिर रही खबरों के सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक देवेंद्र फडणवीस के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर रावसाहेब दानवे, विनोद तावडे, संभाजी निलंगेकर पाटील और चंद्रकांत पाटिल में से किसी एक के आसीन होने की संभावना है।
राजनीति के कई जानकार केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की बात भी कह रहे हैं। जिनके मुताबिक देवेंद्र फडणवीस नए रक्षामंत्री, वर्तमान वित्तमंत्री अरुण जेटली को नया गृहमंत्री, वर्तमान पेट्रोलियम मंत्री पियूष गोयल को अर्थमंत्री बनाया जा सकता है। दिल्ली में देवेंद्र फडणवीस को कोयला और खनिज मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया जा सकता है। इस बारे में दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक हो चुकी है। लेकिन जो टाइम दोनों की मुलाकात को लेकर बताया जा रहा है उस वक्त अमित शाह गोवा में मनोहर पर्रिकर के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित थे।

दूसरी तरफ केंद्र में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने देवेंद्र फडणवीस को कम से कम तेरह वर्ष तक मुख्यमंत्री पद पर रहने का दावा कर रहे हैं। इस दावे में अतिशयोक्ति है फिर भी उनके भावार्थ समझने लायक हैं। ढाई वर्ष तक कुशलता पूर्व महाराष्ट्र की सत्ता संभाल चुके देवेंद्र फडणवीस ने महत्वपूर्ण महानगरपालिकाओं, स्थानिक निकायों में भाजपा को 'अभूत पूर्व' सफलता दिलाई है, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उन्हें दिल्ली बुलाने का कोई विचार नहीं है। फिर भी बातों की पतंग ऊंची उड़ान भर रही है। जिसके मुताबिक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को केंद्र में बड़ी भूमिका देने पर भी विचार किया जा रहा है। एक अन्य पर्याय के रूप में देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाने पर चर्चा हो रही हैै। राज्य में मराठा आरक्षण की मांग जोर पकड़ रही है, जिसके तहत महाराष्ट्र के मराठा समाज के नेता को मुख्यमंत्री पद पर बैठाया जाना इस मांग की भूमिका हो सकती है। लेकिन यह सब चर्चा केवल प्राथमिक स्तर पर है। जोर का झटका देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महारत हासिल है जिसका नजारा नोटबंदी के दौरान जनता देख चुकी है। पर्रिकर के बाद राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, शिवराजसिंह चौहान, देवेंद्र फडणवीस आदि प्रधानमंत्री के राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक के लिए मन बना चुके हैं।

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