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उबाठा और मनसे के वचननामा से हिन्दू और हिंदुत्व शब्द गायब - राहुल शेवाले

उबाठा और मनसे का वचननामा २०१७ का कॉपी पेस्ट

उबाठा और मनसे के वचननामा से हिन्दू और हिंदुत्व शब्द गायब - राहुल शेवाले
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महानगर पालिका चुनाव को लेकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुंबई के लिए वचननामा जाहीर किया इस वचननामा में कई तरह के वादे किए इस पर शिवसेना के महासचिव और पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने प्रेस के जरिए खुलासा करते हुए कहा की पूरा वचननामा पिछले वचननामा का कॉपी पेस्ट है कुछ नया नहीं है बल्कि इस वचननामा में हिंदुत्व और हिन्दू पूरी तरह से  गायब है। हिन्दू हृदय सम्राट बाला साहब के नाम के आगे से हिंदू ह्रदय सम्राट हटा दिया गया है इसकी वजह यह है की एक विशेष  समुदाय को उनको खुश करना है ताकि उनके वोट इन्हे मिल सके। यह वोट पाने के लिए बाला साहब के विचारों का खून कर दिया है।  (The words Hindu and Hindutva are missing from the manifestos of the Uddhav Thackeray faction and MNS says Rahul Shewale)

"पूरे वचननामा से हिन्दू शब्द गायब"

राहुल शेवाले ने उबाठा और मनसे को घेरते हुए यह सवाल किया की क्या वजह है की पूरे वचननामा से हिन्दू शब्द गायब कर दिया गया है। साल २०१७ के चुनाव में जो वचननामा था वही वचननामा एक बार फिर से सबके सामने रख दिया गया है यह पूरी तरह से कॉपी पेस्ट है। एक दिन पहले जिस तरह से बच्चों ने अधूरी जानकारी लोगो के सामने रखी वर्कशॉप के नाम पर उसी तरह से उनके पालक ने भी अधूरी जानकारी दी ,पुरे वचननामा में मराठी शब्दों से ज्यादा इंग्लिश शब्दों का इस्तेमाल किया गया है इस पर राज ठाकरे की क्या भूमिका है साफ़ करनी चाहिए। 

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर निशाना

राहुल शेवाले ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वचननामे में भले ही बालासाहेब ठाकरे का फोटो लगाया गया हो, लेकिन उसमें उनकी आत्मा नहीं है। बालासाहेब ठाकरे का सम्मान और आदर न करने वाला उबाठा मनसे और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस का यह वचननामा शिवसैनिकों और मराठी आदमी को गहरी पीड़ा देने वाला है। उन्होंने कहा कि पूरे वचननामे में “हिंदुहृदयसम्राट” शब्द का जानबूझकर उल्लेख टालते हुए उबाठाने हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष में ही उनका अपमान किया है। शेवाळे ने सवाल उठाया कि ढाई साल मुख्यमंत्री रहने के बावजूद मुंबई में मेडिकल कॉलेज और कोळीवाड़ों की अनधिकृत निर्माणों को नियमित करने का निर्णय क्यों नहीं लिया गया।

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