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मराठी भाषा नहीं आती है तो आ सकती है मुश्किल

सरकारी कार्यालयों को आम लोगों के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाओं, लाइसेंस, पंजीकरण, विभागीय नियमावली, नोट्स, पत्र, फीडबैक, नोटिफिकेशन का भी उपयोग मराठी भाषा में होना चाहिए।

मराठी भाषा नहीं आती है तो आ सकती है मुश्किल
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राज्य सरकार ने अपने एक आदेश में कहा है कि अब हर अधिकारी को किसी भी सरकारी योजना की जानकारी फोन पर मराठी भाषा में देनी होगी। अब राज्य के प्रशासन में मराठी भाषा का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। 31 जनवरी को सरकार द्वारा जारी किये गये जीआर (शासकीय निर्णय) में कहा गया है कि, अब सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस बाबत आदेश दिया है कि अब सभी सरकारी कार्यक्रम, कैबिनेट की बैठक और उच्च स्तरीय बैठकों में कोई भी प्रस्तुति मराठी भाषा में ही देनी होगी। देने के आदेश जारी किए हैं। सरकार ने 31 जनवरी को यह आदेश जारी किया है।

शिवसेना ने अपने चुनावी वादों में भी राज्य में मराठी भाषा का उपयोग करने पर बल दिया था। इसीलिए अब जब शिव सेना सत्ता में आ गयी है तो उसने मराठी को सख्ती से लागू करने के लिए ही यह आदेश पारित किया है। यही नहीं प्रशासन के सभी विभाग इसका अनुपालन कर रहे हैं या नहीं यह देखने के लिए सरकार की तरफ से सतर्कता अधिकारियों की भी नियुक्ति की है।

राज्य के कामकाज में  मराठी भाषा का उपयोग अनिवार्य करने के साथ-साथ सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी सरकारी कार्यालयों को आम लोगों के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाओं, लाइसेंस, पंजीकरण, विभागीय नियमावली, नोट्स, पत्र, फीडबैक, नोटिफिकेशन का भी उपयोग मराठी भाषा में होना चाहिए। यहां तक की सरकारी बोर्डों, पैनलों, रेलवे स्टेशनों और गांवों के नाम भी मराठी में होने आवश्यक हैं। जैसे उदाहरण के लिए 'बांद्रा' को मराठी में 'वांद्रे' की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी विज्ञापनों को कम से कम दो मराठी समाचार पत्रों में प्रचारित किया जाना चाहिए। सरकार ने आदेश दिया है कि भर्ती के लिए भी प्रतियोगिता मराठी में होनी चाहिए, वेबसाइट पर जानकारी मराठी में होनी चाहिए, अगर यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती है तो यह अंग्रेजी और मराठी दोनों में होनी चाहिए।

पढ़ें: 'महाराष्ट्र में हर मीडियम के स्कूलों में मराठी भाषा होगी अनिवार्य'

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