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महिलाओं को तत्काल मिले न्याय, हर जिले में बनेगा महिला पुलिस स्टेशन- उध्दव ठाकरे

महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि, महिला की सुरक्षा हमारी मुख्य प्राथमिकता है, अगर कोई अधिकारी इसे लेकर लापरवाही बरततता है तो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

महिलाओं को तत्काल मिले न्याय, हर जिले में बनेगा महिला पुलिस स्टेशन- उध्दव ठाकरे
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महिला सुरक्षा (women security) का मुद्दा बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी सामने आया। यह बैठक मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) की अगुवाई में हुई, इस बैठक में महिला सुरक्षा को लेकर 5 मंत्रियों की समिति गठित करने का निर्णय लिया गया, ताकि कठोर कानून बनाया जा सके। समिति में गृहमंत्री अनिल देशमुख, महिला व बाल कल्याण मंत्री यशोमति ठाकुर, स्कूली शिक्षामंत्री वर्षा गायकवाड, परिवहन मंत्री अनिल परब और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे शामिल होंगे।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के वर्धा (wardha) जिले में एक शख्स ने एक तरफा प्यार के चलते एक महिला को सरे आम आग लगा दी। जिसके बाद महिला पिछले चार दिनों से अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही है। इस घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में गुस्से का माहौल है। कई जिलों में महिलाओं ने मोर्चा आंदोलन कर इस घटना के प्रति नाराजगी व्यक्ति की और आरोपी को सजा दिलाने की मांग की।   

जिसके बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य में हो रहे महिला अत्याचार की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा और महिला अत्याचार की घटनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता स्तर पर लेने के आदेश गृह मंत्रालय को दिया है। साथ ही उन्होंने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को और अधिक सावधानी से काम करने का निर्देश दिया। 

उस बाबत उन्होंने कहा, राज्य सरकार पीड़ित महिलाओं के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेगी। मेरी तरफ से गृह विभाग कोआदेश दिया गया है कि पुलिस जरूरतमंद लोगों को कानूनी सुरक्षा और सहयोग प्रदान करे।

उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने, जल्द से जल्द जांच शुरू करने, अपराध साबित करने के लिए आवश्यक सबूत जुटाने के साथ-साथ  अदालत में तेजी से चार्जशीट दाखिल करने और पूरी तरह से सबूत के साथ मामले को जल्द से निपटाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने हर जिले में महिला पुलिस स्टेशन स्थापित करने का निर्देश गृह विभाग को दिया। उन्होंने कहा, महिला थाना इस बात को निश्चित करेगा कि पीड़ित महिलाओं की फरियाद सुनी जाए और उनकी शिकायत तत्काल दर्ज की जाए।

और अगर जब मामला अदालत में जाता है तो सरकार विशेष अदालतों और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए मामले में न्याय दिलाने का काम किया जाएगा। 

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