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भारत में महिलाओं की आबादी लगभग पूरी जनसंख्या का आधा है। 2011 के जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या बीते एक दशक में 18.1 करोड़ बढ़कर 1.21 अरब हो गई है। जनगणना के आँकड़ों के मुताबिक, देश में पुरुषों की संख्या अब 62.37 करोड़ और महिलाओं की संख्या 58.64 करोड़ है। लेकिन कमाई के मामले में महिलाए , पुरुषों से कम दिखाई दे रही है।

पुरुषों और महिलाओं की आय में दोगुना अंतर

साक्षर पुरुषों की संख्या 44.42 करोड़ और साक्षर महिलाओं की संख्या 33.42 करोड़ है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की गुरुवार को पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता के मामले में भारत 21 पायदान नीचे खिसक कर 108वें स्थान पर पहुंच गया है। खास बात ये ही की इस मामले में चीन और बांग्लादेश भारत से काफी आगे है। सूची में बांग्लादेश 47वें और चीन 100वें पर है।

रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं एक समान काम के लिए पुरुषों के वेतन का करीब 60 प्रतिशत ही पाती हैं। देश में केवल 13 प्रतिशत महिलाएं ही वरिष्ठ पदों, मैनेजर और विधायी पदों पर काम कर रही हैं। अगर वेतन की बात की जाए की तो वैश्विक औसत कमाई उच्च वेतन के मामले में जहा पुरुष एक साल में 13.56 लाख रुपये कमाते है तो वही महिलाए 7.74 लाख रुपये रुपये कमाती है।

राजनीतिक में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
भारत भले ही पुरुष और महिलाओं की कमाई के अंतर में कोई खास बदलाव नहीं कर पाया है लेकिन भारत में राजनीति में महिलाओं का दबदबा बढ़ा है। इसमें स्थानीय निकायों में 50 फीसदी आरक्षण अहम है। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के मामले में देश 20वें स्थान पर है।

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